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Bhadohi News: लोकसभा चुनाव में जीत का मिला इनाम, दीपक मिश्रा दोबारा बने भाजपा जिलाध्यक्ष

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भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने एक फिर दीपक मिश्रा पर भरोसा जताया है। उन्हें दूसरी बार जिलाध्यक्ष का दायित्व साैंपा है। रविवार को जोरई स्थित पार्टी कार्यालय में चुनाव अधिकारी दिनेश राय ने दीपक मिश्रा के नाम की घोषणा की। इसी के साथ दो महीने से जिलाध्यक्ष पद के लिए चल रही कयासबाजी पर विराम लग गया। हाॅल जय श्रीराम और भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद के नारे से गूंज उठा। राजनीतिक विषय के जानकारों का मानना है कि दीपक मिश्रा को लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा की शानदार जीत का इनाम मिला है।
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जिले में बीते दो महीने से भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक सरगर्मी थी। रोज नए-नए कयास लगाए जा रहे थे। बीते 11 जनवरी को जिलाध्यक्ष के लिए 10 महिलाओं समेत 55 लोगों ने नामांकन किया था। नामांकन के करीब दो महीने बाद नाम सामने आया है। जिलाध्यक्ष के लिए दीपक मिश्रा ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद रहे। जिलाध्यक्ष के नाम एलान से पहले सुबह से ही पार्टी कार्यालय पर गहमागहमी का माहौल था। कार्यालय पर 10 बजे ही कार्यकर्ता जुट गए थे। करीब दो बजे चुनाव प्रभारी दिनेश राय और क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल पार्टी कार्यालय पहुंचे। दोनों ने सीधे एक कमरे में चले गए। करीब 2.30 बजे दोनों नेता कार्यालय के सभागार में आए। जिला प्रभारी नागें रघुवंशी और चुनाव प्रभारी दिनेश राय ने पार्टी कार्यकर्ताओं के महत्व को रेखांकित किया। लगभग तीन बजे चुनाव प्रभारी ने दीपक मिश्रा के नाम का एलान किया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने दीपक मिश्रा को फूल मालाओं से लाद दिया। दीपक मिश्रा के दोबारा जिलाध्यक्ष बनने पर जिला प्रभारी नागेंद्र रघुवंशी, पूर्व जिलाध्यक्ष घनश्याम मिश्र, संतोष पांडेय, विनय श्रीवास्तव, पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय, जिला पंचायत अध्यक्ष अनुरुध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, संगीता खन्ना, लालता प्रसाद सोनकर, सप्तशील गुप्ता, गोवर्धन राय, मनीष पांडेय, दीपक, शिवम, छत्रपति सिंह, प्रमोद दुबे, सुभाष दुबे, कोको दुबे ने बधाई दी। -
दीपक मिश्रा युवाओं और ब्राह्मणों में अच्छी पकड़ रखते हैं

ज्ञानपुर के उमरिया गांव दीपक मिश्रा की युवाओं और ब्राह्मणों में अच्छी पकड़ है। वे खाटी भाजपाई परिवार से ताल्लुक रखते हैं। दीपक जिलाध्यक्ष बनने से पहले जिला मंत्री का दायित्व भी निभा चुके हैं। इनके पिता घनश्याम मिश्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जूझारू स्वयंसेवक के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इनके चाचा अरूण मिश्र आरएसएस के जिला शारीरिक प्रमुख रह चुके हैं। दीपक मिश्रा छात्र राजनीति से भी जुड़े रहे। वे 2005 से 2007 तक सह संयोजक खेल प्रकोष्ठ रहे। इसके बाद बूथ अध्यक्ष, आरएसएस मंडल कार्यवाहक, एबीवीपी के महाविद्यालय इकाई प्रमुख, युवा के जिला कार्यसमिति सदस्य, सहकारिता प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और 2016 से 2019 तक भाजपा जिला मंत्री का दायित्व संभाला। 2018 से 2023 तक सहकारी संघ लि. ज्ञानपुर के अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। 2023 में इन्हें पहली बार भाजपा जिलाध्यक्ष भदोही की जिम्मेदारी मिली थी।
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संगठन को जोड़े रखने और लोकसभा चुनाव जीतने का मिला इनाम
जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा को दोबारा जिम्मेदारी मिलने के पीछे लोकसभा चुनाव में जिले में भाजपा का शानदार प्रदर्शन है। भदोही की राजनीति में ब्राह्मणों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिले में 18 लाख में से तीन लाख से ज्यादा वोटर ब्राह्मण है। लोकसभा चुनाव के दौरान कई ब्राह्मण चेहरे टिकट के लिए दावा कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने सामाजिक समीकरणों को देखते हुए मछुआ समाज से आने वाले डॉ. विनोद बिंद पर भरोसा जताया। इससे परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा। लोकसभा में पूर्वांचल में बनारस के बाद भदोही में भाजपा को जीत मिली थी। जिलाध्यक्ष भदोही के लिए पहले से तय माना जा रहा था कि ब्राह्मण चेहरे को ही जिम्मेदारी मिलेगी। दीपक मिश्रा कार्यकर्ताओं को संगठन को जोड़े रखने में माहिर है। इसी का इनाम शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें दिया है।
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