फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पौधरोपण कर भूले जिम्मेदार, सूख रहे पौधे

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्ञानपुर (भदोही)। पर्यावरण संरक्षण की मुहिम कालीन नगरी में कागजों में सिमट सिमटती नजर आ रही है। वन महोत्सव के तहत एक सप्ताह में 11 लाख से अधिक पौधे लगे, लेकिन निगरानी न होने से बहुतसे पौधे मुरझाकर सूखने लगे हैं। जल्द ही ध्यान न दिया गया तो 50 से 60 फीसदी पौधे सूख जाएंगे।
विज्ञापन

सूबे में एक दिन 25 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य था, जिसमें जिले को 13 लाख 75 हजार पौधे लगने थे। पांच जुलाई को एक ही दिन नौ लाख 75 हजार पौधे लगाए गए। छह और सात जुलाई को मिलाकर यह संख्या 11 लाख से अधिक पहुंच गई। पौधरोपण को सफल बनाने के लिए शासन से नामित अफसर, प्रभारी मंत्री से लेकर माननीयों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, लेकिन पौधे लगाने के बाद सभी संरक्षण का संकल्प भूल गए। जहां-जहां पौधे रोपे गए वहां न तो उन्हें पानी दिया गया और न ही निगरानी की गई। इस कारण कुछ पौधे मवेशी चर गए तो कुछ पानी के बिना सूख गए। कागजों पर ये भले ही जिम्मेदारों को हरे भरे दिख रहे हों। पड़ताल में यह सूखे, मुरझाए और दम तोड़ चुकने वाले हालत में मिले। इलाके को हरा-भरा रखने की कवायद औंधे मुंह है। पौधरोपण के दौरान इन्हें बचाने, देखरेख करने का संकल्प भी दिलाया गया था। अभियान चलाकर खूब वाहवाही लूटी गई, लेकिन बाद में इनकी ओर पलट कर किसी ने नहीं देखा। भदोही के डुड़वा धरमपुरी, सुरियावां के अर्जुनपुर, बरमोहनी, करियावं के सार्वजनिक स्थलों पर लगे कई पौधे सूख गए। कमोबेश अन्य स्थानों पर यही हालत है।
पौधों का ध्यान रखना जरूरी
ज्ञानपुर। पर्यावरण प्रेमी अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि वह गुजरे चार साल से प्रतिदिन पौधरोपण कर रहे हैं। जो पौधे लगाते हैं उसे हर तीसरे दिन देखने जाते हैं। उसकी बराबर निगरानी की जाती है। सिर्फ पौधरोपण से ही इतिश्री नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन

डीएफओ, नीरज आर्या ने बताया कि क्षेत्रीय वनकर्मियों को निगरानी के लिए कहा गया है। नगरीय इलाकों में टैंकर के माध्यम से पानी दिया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में लगे पौधों को प्रधान के माध्यम से पानी देना है। जिन स्थानों पर पौधे सूखेंगे वहां दुबारा लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें