भदोही। रमजान के चांद का दीदार सोमवार को हो गया। चांद दिखने के बाद मस्जिदों में नमाजे तरावीह की शुरुआत हो गई। इस्लाम धर्म के अनुयायी पहला रोजा मंगलवार को रखेंगे। बेसब्री से रमजान के चांद का इंतजार कर रहे लोगों ने चांद दिखते ही अतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। सउदी अरब और खाड़ी देशों में रविवार को ही चांद का दीदार होने के बाद सोमवार को पहला रोजा रखा गया। मुकद्दस रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। चांद की तस्दीक होने के बाद शाम को मगरिब की नमाज के बाद विभिन्न मस्जिदों से चांद के दीदार होने की सूचना प्रसारित की गई। इसके बाद लोग सहरी और इफ्तार में खाने पीने की वस्तुएं लाने के लिए नगर के प्रमुख बाजार कटरा का रुख कर लिया। शाम को बाजार में महिला पुरुष खरीदारी करते दिखे। खजूर, आलू के चिप्स, बेसन, पापड़, मेवा मसाला, फलों, चना, मटर की दुकानों पर भीड़ लगी रही। देर शाम तक बाजार में चहल पहल रही। चांद नजर आने के साथ ही भदोही नगर के अजिमुल्लाह चौराहे और कटरा बाजार में खजूर, सेवई, और तरह तरह के चिप्स की अस्थायी दुकानें सज गईं। उधर परंपरा के अनुसार माहे रमजान का चांद दिखते ही सोमवार की शाम से विभिन्न मस्जिदों में एशा की नमाज के दौरान तरावीह भी शुरू कर दी गई। उलेमाओं ने कहा कि मंगलवार को पहला रोजा रखने के लिए तड़के सहरी की जाएगी।
सबसे लंबा 13 घंटे 55 मिनट का होगा अंतिम रोजा
भदोही। इस वर्ष मुकद्दस रमजान का पहला रोजा 13 घंटे 11 मिनट का होगा। जबकि सबसे लंबा रोजा अंतिम रोजा होगा। उस दिन अकीदतमंद 13 घंटे 55 मिनट तक अल्लाह की राह में भूखे प्यासे रहेंगे। मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल अशर्फी ने बताया कि रमजान में हर दिन सहरी का वक्त घटता जाता है और इफ्तार का वक्त बढ़ता जाता है। पहला रोजा सबसे छोटा होगा जो 13 घंटे 11 मिनट का होगा। जबकि अंतिम रोजा 13 घंटे 55 मिनट का होगा। उन्होंने कहा कि लोग माहे रमजान, रोजा, सहरी और इफ्तार को सही से समझें। कहा कि बहुत से लोग बिना सहरी किए ही रोजा रख लेते हैं जो सही नहीं है। इसलिए सहरी लेना सुन्नत है। उन्होने बताया कि सहरी और इफ्तार करने की अलग अलग दुआएं भी हैं। लोग खुद भी इसकी जानकारी करें और बच्चों को भी जानकारी दें।