खुले मैदान में कालीनों की लेटेक्सिंग कार्य में लगे कालीन मजदूर। (फाईल फोटो)
जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश से कालीन कामगारों के हाथ थम गए हैं। हैंडटफ्टेड और हैंडलूम कालीनों की लेटेक्सिंग नहीं हो पा रही है। बारिश से कालीनों की लेटेक्सिंग कर प्रतिदिन कमाने खाने वालों की परेशानी बढ़ गई है। कालीनों की तैयारी के लिए कालीन निर्यातक अन्य विकल्पों का सहारा ले रहे हैं।
हैंड टफ्टेड कालीनों सहित कुछ प्रकार के कालीनों की तैयारी बिना लेटेक्सिंग कराए नहीं हो पाते। लेकिन लेटेक्सिंग कराने के लिए सूखी जमीन और कड़ी धूप आवश्यक होता है। जब-जब वर्षा होती है तो कामगारों के हाथ रुक जाते हैं। इधर जब से बारिश हो रही है जमीन गीली हो चुकी है। बारिश थम ही नहीं रही है। इससे लेटेक्सिंग का काम ठप हो गया है। नईबाजार जाहिदपुर के सलीम कहते हैं यह काम मजदूरों का है। एक दिन भी अगर काम थमता है तो मजदूर सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। कहा कि कुछ बड़े कारोबारियों ने लेटेक्सिंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है। इससे उनका काम नहीं प्रभावित होता है लेकिन मजदूराें का नुकसान होता है।
उधर, काम ठप होने से कालीन निर्यातकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। कालीन निर्यातक एजाज अंसारी ने कहा कि कालीनों का आर्डर समयबद्ध होता है। आम तौर पर इस समय मौसम साफ रहता है। इस मौसम ने दिक्कत खड़ी की है। हालांकि अभी भी बहुत से लोग जनवरी 2027 में जर्मनी में होने वाले हिमटेक्सटिल- 2027 की तैयारियों में लगे हैं। ऊन की रंगाई के लिए भी यह मौसम ठीक नहीं माना जा रहा है क्योंकि लोगों के अत्यधिक माल डाईंग हाउस में पड़े हैं और काम नहीं हो पा रहा है।