ज्ञानपुर। जिले में समस्याओं की कमी नहीं है। दशहरा पर भले ही बुराई के रावण के पुतले को जलाकर खत्म कर दिया जाए, लेकिन समस्याओं का रावण इस दशहरा बाद भी जस के तस रहने वाले हैं, उनके खात्मे के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत है। सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर तमाम क्षेत्रों में समस्याओं का अंबार लगा है। उन्हें खत्म करने के लिए प्रशासन को संकल्प लेने की जरूरत है। प्रशासनिक अधिकारी इन समस्याओं से वर्ष भर जूझने और उनके समाधान का दावा करते हैं। लेकिन, असलियत इसके उलट है। समस्याओं का रावण अट्टहास करते हुए अब भी कह रहा है...तुम मुझे यूं जला न पाओगे। समस्याओं की लंबी फेहरिस्त में से 10 प्रमुख समस्याओं का रावण व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है...
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बदहाल सड़कें
जिले में सड़कों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। प्रमुख मार्गों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सड़कें जर्जर हाल हैं। जिन पर चलना भी मुश्किल हो गया है। आए दिन जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं इन सड़कों हालत को बयां करती हैं। बदहाली के कारण वाराणसी-प्रयागराज हाईवे और दुद्धी-लुंबिनी राजमार्ग पर भी यात्रा सुगम नहीं रह गई है। बारिश के सीजन में सड़कों की बदहाली और भी बढ़ गई है। सबसे बुरी हालत गांवों की सड़कों की है। जिम्मेदार विभाग आंख मूद कर बैठे हैं।
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बिजली कटौती
सरकार के तमाम दावों के बीच बिजली की मनमानी कटौती ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी है। नगरों में 20 और गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल बेमतलब हो गया है। जिला मुख्यालय पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति की तो बात ही छोड़ दीजिए। बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसके बारे में कोई नहीं जानता। दिन-दिन भर बिजली गायब रहना सामान्य बात हो गई है। जर्जर तार और पोल बिजली आपूर्ति की दुर्गति करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
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दूषित पेयजल
पानी की समस्या भदोही जिले की बुनियादी समस्याओं में शुमार होती जा रही है। नगरों में सप्लाई के पानी से लेकर गांवों में भूगर्भ से निकलने वाले जल को भी ग्रामीण पी नहीं पाते। कोनिया क्षेत्र में आर्सेनिक युक्त पानी तो सुरियावां के कैड़ा क्षेत्र में खारे पानी की समस्या लोगों में बीमारियां बढ़ा रहा है। आर्सेनिक के प्रभाव से हैंडपंप से निकलने वाला पानी घंटे भर के अंदर ही पीला पड़ जाता है। इसी तरह खारे पानी से ग्रामीणों को दांतों में रोग होने लगा है।
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बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
कालीन कारोबार के जरिए दुनिया भर में मशहूर भदोही जिले में स्वास्थ्य सेवाएं अब तक पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहीं स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए अब तक कारगर कदम नहीं उठाए गए। लिहाजा बड़ी संख्या में असमय मौतें नियति बन गईं हैं। ज्यादातर सरकारी अस्पताल रेफरल बनकर रह गए हैं। ऐसे में आपात काल में प्रयागराज और वाराणसी जाने वाले मरीजों को कई बार रास्ते में ही जान से हाथ धोना पड़ जाता है।
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भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार के रावण ने समूचे सिस्टम को जकड़ रखा है। सरकारी कार्यालयों की हालत ज्यादा खराब है। कहते हैं कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। यहां तो मछलियों की भरमार है। तहसीलों से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक भ्रष्टाचार का बोलबाला है। एंटी करप्शन टीम ने एक लेखपाल और तहसील के एक बाबू को रंगेहाथ पकड़ कर भ्रष्टाचार को उजागर किया था, लेकिन उसके बाद भी हालात में कहीं से भी सुधार नहीं दिखता।
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बेरोजगारी
भदोही जिले में बेरोजगारी की बड़ी समस्या मुंह बाए खड़ी है। बेरोजगारी के दशानन ने युवा शक्ति को निराशा की लंका में कैद कर रखा है। सरकारी कागज पर जिले में 35 हजार के आसपास बेरोजगार दर्ज हैं, जबकि असली आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। रोजगार सृजन और युवाओं को रोजगार मिलने की बेहद धीमी गति से हालात विकट होते जा रहे हैं। जिला सेवायोजन विभाग जब तब रोजगार मेले का आयोजन कर उनके आंसू पोछने का काम करता है।
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प्रदूषण
केंद्र की मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान को लापरवाही ने केवल कागजों तक ही समेट दिया है। जगह-जगह गंदगी का अंबार व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। घर-घर शौचालय के नाम पर प्रशासनिक अफसरों की खानापूर्ति की असलियत किसी से छिपी नहीं है। 80 फीसदी के आसपास शौचालय अपूर्ण हैं। सीटीपी की व्यवस्था न होने के कारण शहर के कचरे को जगह-जगह फेंक दिया जाता है। उसके निस्तारण का कोई इंतजाम नहीं है।
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महिला अपराध
कालीन नगरी में आधी आबादी के साथ अपराधों में भी कोई कमी नहीं है। छेड़खानी, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा की खबरें आए दिन सुर्खियां बनती हैं। महिलाओं पर नाना प्रकार के उत्पीड़न और रेप की घटनाएं आम हो गईं हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास छात्राओं के साथ बदसलूकी पुलिस की नाकामी को दर्शाता है। आते-जाते उन पर फब्तियां कसना और पीछा करने की समस्या से छात्राएं आजिज हैं। पुलिस का एंटी रोमियो स्क्वॉयड कारगर साबित नहीं हो पा रहा।
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महंगाई
महंगाई के रावण का अट्टहास काफी भयावह हो चुका है। रोजमर्रा की वस्तुओं पर महंगाई की मार से सामान्य आदमी त्रस्त हो गया है। प्याज 60 रुपये किलो तो अरहर की दाल 90 रुपये किलो खरीद कर खा रहे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दाल-रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं। कमरतोड़ महंगाई से लोग बेहाल हैं। लोगों को इस बात की आस अब भी है कि शायद आने वाले समय में जल्द ही महंगाई से राहत मिलेे।
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जाम
जाम का कालीन नगरी से गहरा नाता हो गया है। हाईवे से लेकर नगरों तक जाम की समस्या से लोग खीझ उठे हैं। राजमार्ग के सिक्सलेन निर्माण कार्य के चलते घंटों तक लंबा जाम यातायात की गति पर ब्रेक लगा देता है, लेकिन अक्सर सताने वाली इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे लोगों को घंटों तक का समय बर्बाद करना पड़ता है। भदोही नगर और गोपीगंज में जाम की समस्या लगभग हर रोज की समस्या बन गई है।
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