पर्यावरण प्रदूषण के मामले में कालीन नगरी वैसे तो वाराणसी और सोनभद्र की तुलना में सुरक्षित है, लेकिन सर्दी का मौसम आते ही यहां का प्रदूषण सामने आने लगता है। कभी कुहासा तो कभी धूंध की चादर दिखता है। मौसम के बदलाव संग प्रदूषण की मार जब शुरू होती है तो सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को होती है। ऐसे समय में सावधानी और सतर्कता ही लोगों की जान बचा सकती है।
करीब 20 लाख से ज्यादा की आबादी वाले जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोई यंत्र नहीं लगाया गया है, जिससे यहां के एयर क्वालिटी इंडेक्स की जानकारी हर समय नहीं हो पाती। वाराणसी के क्षेत्रीय कार्यालय से यहां की स्थिति पर नजर रखी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो भदोही में प्रदूषण ज्यादा नहीं है। आमतौर पर यहां नियंत्रण में ही रहता है। जब कभी बढ़े होने की आशंका होती है तो जांच करायी जाती है। वाराणसी से ही टीम आकर यहां के विभिन्न इलाकों में जांच करती है। जो रिपोर्ट आती है उसी के अनुसार सतर्कता बरती जाती है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय किए जाते हैं।
ण नियंत्रण बोर्ड-वाराणसी