परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। लापरवाही का आलम यह है कि तालाब-पोखरे और सड़कों के किनारे स्थित कई स्कूलों की अब तक बाउंड्री भी नहीं कराई गई है। इसके चलते छुट्टी के बाद स्कूलों में खेलने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा खतरे में है। बच्चे सड़क, तालाब के समीप पहुंच जाते हैं। नदियों के सीमावर्ती स्कूलों में तो जंगली जानवर भी पहुंच जाते हैं। ऐसे स्कूलों की संख्या जिले में 201 बताई जा रही है।
जिले में कुल 891 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय और कंपोजिट विद्यालय हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत करीब चार साल से स्कूलों की तस्वीर बदली जा रही है। शिक्षा विभाग, पंचायत राज विभाग के संयुक्त प्रयास और प्रधानों की मेहनत से तमाम विद्यालय चमकने लगे हैं, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सुरक्षा मानकों के तहत विद्यालयों में बाउंड्रीवाल होना जरूरी है। इससे इतर जिले के 201 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाउंड्री ही नहीं है। इनमें 120 प्राथमिक और 81 पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। गौर करने वाली बात है कि बाउंड्रीवाल विहीन ज्यादातर स्कूल या तो सड़क के किनारे स्थित हैं अथवा तालाब-पोखरों से सटे हुए हैं। ऐसे में बच्चों के स्कूल आते-जाते वक्त अभिभावकों में भय बना रहता है। मध्यावकाश में जब विद्यार्थी एमडीएम खाने के बाद खेलने जाते हैं तो चिंता और बढ़ जाती है। शिक्षक और अभिभावक दोनों ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सहमे रहते हैं, जबकि जिम्मेदार इसके प्रति चुप्पी साधे हुए हैं।
उधर, अभोली ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कनकपुर में बाउंड्री नहीं बनी है। प्रधानाध्यापक पिंटू सिंह ने बताया कि बाउंड्री नहीं होने के कारण कई बार जंगली जानवर कुत्ते, सियार विद्यालय में पहुंच जाते हैं। एमडीएम परोसने के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी बच्चों की सुरक्षा में लगती है। दो साल पूर्व स्कूल को आबकारी विभाग ने गोद भी लिया, लेकिन अफसर आज तक नहीं पहुंचे। अभिभावक नायब बिंद, शीतला, फूलचंद, राम कुमार, आदित्य ने विभागीय अधिकारियों से अविलंब बाउंड्री बनवाने की मांग की है। इसी तरह से डीघ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय नवधन बहचरियान में भी बाउंड्री नहीं बन सकी है। इसके चलते स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मार्ग पर जाने का भय बना रहता है। ग्रामीणों और शिक्षकों ने पूर्व में इसकी शिकायत कई बार विभागीय अधिकारियों से की, लेकिन अब तक बाउंड्री नहीं बन सकी है। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह का कहना है कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की बाउंड्री बनाई जा रही है। करीब 201 स्कूलों की बाउंड्री नहीं बन सकी है। इसे बनवाने का प्रयास चल रहा है।