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भदोही: उपभोक्ता से अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी बैंक को पड़ी भारी, 15 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश

Thu, 08 Feb 2024 06:27 PM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भदोही

सार

भदोही में 24 दिसंबर को 2020 को एक दुकान में आग लगने से हुई लाखों की क्षति हुई थी। वादी ने गोपीगंज में तहरीर भी दी। इसके बाद वादी ने शाखा प्रबंधक, रीजनल प्रबंधक केनरा बैंक सिगरा और मंडलीय प्रबंधक को सूचना दी। इसके बाद भी उन्हें क्षतिपूर्ति क्लेम नहीं किया गया। इसके बाद पीड़ित जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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भदोही में केनरा बैंक की ज्ञानपुर शाखा को उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार और सेवा में कमी भारी पड़ गई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक को 15 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के साथ सेवा में कमी और वाद दायर करने के लिए खर्च हुए 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने का निर्देश दिया। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ वाद को खारिज कर दिया।

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वहीं बैंक को दो माह के भीतर उपभोक्ता को धनराशि देने का निर्देश दिया। चेताया कि अगर तय समय पर क्षतिपूर्ति नहीं दी गई तो 12 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। गोपीगंज कोतवाली के सराय मोहाल निवासी इमरान फर्नीचर एंड स्टील हाउस के प्रोपराइटर वाहिद अहमद ने फरवरी 2021 में केनरा बैंक शाखा के प्रबंधक और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी, सिगरा वाराणसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

मांग की कि उनके प्रतिष्ठान में आग लगने से हुई क्षतिपूर्ति के लिए 20 लाख रुपये और मानसिक कष्ट के लिए 50 हजार बैंक व बीमा कंपनी से दिलाया जाए। वादी के अधिवक्ता मजहर शकील ने बताया कि वादी का केनरा बैंक प्रबंधक ने सीसी लिमिट खाता स्वीकृत किया था। जिसका बैंक ने बीमा कंपनी से बीमा भी होने की बात कही गई थी। नियमित प्रीमियम का भुगतान सीसी लिमिट खाता से किया जाता था।
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इस बीच 24 दिसंबर 2020 को वादी की दुकान में शाम 7:45 बजे आग लग गई। जिसकी सूचना फर्म के कर्मचारियों द्वारा फायर सर्विस को दी गई। वहीं वादी ने गोपीगंज में तहरीर भी दी। इसके बाद वादी ने शाखा प्रबंधक को लिखित सूचना देते हुए उनके कहने पर रीजनल प्रबंधक केनरा बैंक सिगरा और मंडलीय प्रबंधक को भी सूचना दी गई। इसके बाद भी उन्हें क्षतिपूर्ति क्लेम नहीं किया गया।

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मामला जब जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा तो आयोग ने विपक्षी पार्टी को नोटिस भेजा। जहां बैंक की ओर से  दलील दी गई कि वादी को फर्म का बीमा करना चाहिए था। उसके द्वारा ऐसा नहीं कराए जाने के कारण उसे हुई क्षति का जिम्मेदार विपक्षी बैंक नहीं है।

जिला उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्यीय पीठ के न्यायाधीश अध्यक्ष संजय कुमार डे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बैंक द्वारा उपभोक्ता के साथ सेवा में कमी पाया और 15 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के लिए उपभोक्ता को देने का आदेश दिया। वहीं इंश्यारेंस कंपनी के खिलाफ दायर वाद को खारिज कर दिया। जिला उपभोक्ता आयोग की तीन सदस्य पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार डे, सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव और सदस्य विजय बहादुर सिंह मौजूद रहे।
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