स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों का संचालन लापरवाही में लटक गया है। 546 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 115 शौचालय शुरू हो सके हैं। जबकि 480 का अनुबंध समूहों से हो चुका है। बाकी 431 शौचालय या तो अधूरे हैं या अभी तक किसी कारणवश उनका संचालन नहीं हो सका। उनके बंद होने से लोग खुले में जाने को विवश हैं।
बहू-बेटियां बाहर न जाएं, शौचालय घर में बनवाएं जैसे सरकारी स्लोगन सिर्फ कागजों में सिमटता जा रहा है। आबादी के हिसाब से गांवों में एक साल पूर्व सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू हुआ। शासन की प्राथमिकता में शामिल होने और पंचायत चुनाव के कारण तेजी से काम कराया गया लेकिन अब भी 546 ग्राम पंचायतों में 480 ही पूर्ण हो चुके। पंचायत राज विभाग ने 480 गांवों में सामुदायिक शौचालय के संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों से अनुबंध किया। इसमें अब तक 115 शौचालय ही शुरू हो सके। अभोली के मऊरामशाला, दयालपुर, प्रयागपुर, मसुधी, मिश्राईनपुर, सुरियावां के अर्जुनपुर, ज्ञानपुर के गोपीपुर, डीघ के गोधना, दरवांसी, रामकिशुनपुर बसही, नवधन, केदारपुर, बेरासपुर, नारेपार के शौचालय शुरू नहीं हो सके। कहीं निर्माण अधूरा है तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं हो सका।