भदोही नगर में मुशायरे में शेर पढ़ते शायर शहजादा कलीम। स्रोत-आयोजक
भदोही। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को नगर के मालिकाना स्थित मैदान में दानिश सिद्दीकी फैंस क्लब की ओर से एक शाम-कौमी एकता के नाम मुशायरा और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुशायरे में विभिन्न शहरों से आए शायरों और कवियों ने अपनी गजलों और के शेरों से समां बांध दिया।
एक ओर जहां लोगों ने गंभीर रचनाएं खूब पसंद की। वहीं, हास्य व्यंग्य के शायर अखिलेश द्विवेदी ने अपनी गुदगुदाती रचनाओं से दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों को लोटपोट कर दिया। मुशायरे का आगाज निजाम बनारसी ने नाते पाक से हुआ। इसके बाद लखनऊ के शायर तबरेज राणा ने कुछ खूबसूरत गजलों से वाहवाही लूटी। उन्होंने कहा कि दिखते न थे कहीं जो वह मंजर में आ गए, गम आपको है कैसे बराबर में आ गए। उनकी दूसरी गजल थी, उसकी बस एक निगाह के फिरने की देर थी, मालिक थे जो महल के वो छप्पर में आ गए। प्रतापगढ़ से पधारे शहजादा कलीम ने अपनी शायरी से लोगों को अपना दिवाना बना लिया। उन्होंने अपनी गीत में सुनाया, एक हाथ में आबे जमजम, एक हाथ में गंगा हो, मेरा तो अरमान यही है कि मेरा कफन तिरंगा हो...। दिल्ली से आईं शायरा इल्मा हाशमी ने भी अपने अशआर से लोगों को खूब रिझाया। उन्होंने कहा कि जो मुतमईन है तुझको अजियत में डालकर, वह शख्स तेरा था ही नहीं मत मलाल कर। शाद मशरिकी, जमजम रामनगरी, जुल्फिकार सैफी, रोशन हबीबा, शारिक फुलपूरी, रीना तिवारी, हसन सोनभद्रवी, आरिफ जाफरी, हसन सोनभद्रवी, रिक अदा, तौसीफ कैसियस, अरुण सिंह, अर्सलान फैजानी ने भी अपनी गजलों का जादू बिखरा। रात लगभग साढ़े 10 बजे प्रारंभ मुशायरा भोर में चार बजे तक चला। इस दौरान सर्द रात में भारी संख्या में लोग डटे रहे। मुशायरे की सदारत उस्ताद शायर साबिर जोहरी और निजामत रज्जब शेरवानी ने किया। मुशायरे के संयोजक दानिश सिद्दीकी फैंस एसोशिएसन के अध्यक्ष दानिश सिद्दीकी ने लोगों का स्वागत करते हुए आभार जताया।