रमना कहती हैं कि नियति ने मेरे बेटे की आंखे जरूरी छीन ली हैं, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं छिनी है। अपनी मां के बारे में शिवशंकर उर्फ कोमल कहते हैं कि मेरी आंखों के इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है। मेरी मां वह खर्च तो वहन नहीं कर सकती, लेकिन मैं मेरी मां की आंखों से दुनिया देखता हूं। दुख होता है कि उम्र के इस पड़ाव में जब मां का सहारा बनना चाहिए तो मैं ही इन पर बोझ बना हूं।