कालीन उद्योग पर पिछले दो वर्षों में कोरोना संक्रमण व्यापक रूप से असर पड़ा है। वर्ष 2020 और 2021 के चारो कारपेट एक्सपो नहीं हो सके। अब जबकि कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने मार्च 2022 में इंडिया कारपेट एक्सपो की तिथियां घोषित कर दी है तो कोविड की तीसरी लहर और ओमीक्रॉन को लेकर कालीन उद्यमी सहम गए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक यूरोप और अमरीकी कालीन खरीदार एक्सपो में भाग लेने की स्थिति में नहीं होंगे, तब तक एक्सपो की सफलता पर संशय के बादल मंडराते रहेंगे।
भारत में प्रत्येक वर्ष मार्च में नई दिल्ली और अक्टूबर में वाराणसी में इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन होता है। निर्यातकों का कहना है कि एक एक्सपो से 4 सौ से 5 सौ करोड़ का व्यवसाय होता है। लेकिन वर्ष 2020 के दोनों एक्सपो और वर्ष 2021 के दोनों एक्सपो कोरोना की भेंट चढ़ गए। यही नहीं, जर्मनी में प्रत्येक वर्ष होने वाले डोमोटेक्स भी पिछले दो बार से रदद करना पड़ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद हालात कुछ अनुकूल होने पर सीईपीसी ने अगले वर्ष 25 से 28 मार्च को नई दिल्ली के इंडिया कारपेट एक्सपो की तारीखें घोषित कर दीं, लेकिन तिथि घोषित होते ही ओमिक्रॉन वैरीएंट को देखते हुए कालीन उद्यमी सहम गए हैं। लोगों का कहना है कि कालीन उद्योग पर कई तरफ से मार पड़ रही है। जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। सीईपीसी के चेयरमैन उमर हमीद का कहना है कि इंडिया कारपेट एक्सपो अगले साल मार्च के अंत में होना है। अभी इसमें काफी समय है। लोग अपनी तैयारियां करें। पूरी उम्मीद है कि हालात अनुकूल रहेंगे और फेयर होगा। हम लोग यूरोप और अमरीका पर नजर बनाए हुए हैं। आगे स्थिति और बेहतर होगी।