विकास मिश्रा ज्ञानपुर। कालीन नगरी में जन्मजात बीमारी से ग्रसित 103 बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है। इसमें किसी के होंठ कटे थे, किसी का तालू ठीक नहीं था। किसी के नाक में दिक्कत था, किसी के रीड़ के हड्डी में फूंसी, दिल में छेद आदि जन्मजात बीमारी से ग्रसित रहे। आरबीएसके के तहत नौ बीमारी का उपचार होता है।
स्वास्थ्य विभाग, अनुष्का फाउंडेशन और स्माइल संस्था के संयुक्त प्रयास से बीते तीन साल में 103 बच्चों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया गया है। इस ऑपरेशन से न केवल बच्चों की शक्ल-सूरत में सुधार हुअ है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य को भी नई दिशा दी है। टेड़े पंजा सही हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक औराई कुरौना की अलहम मुसाब (08), अहाद हसैन (12) घोसिया, आयुष (10) वाराणसी, परी राय (13) किशुन दासपुर के तालु कटे थे। इसी तरह औराई की प्रिया (12), ज्ञानपुर लखनों की सोनम यादव (13), भदोही की अलिज्बा (6) आदि को दिल में छेद़ था, जिनका आपरेशन अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में किया गया। जो सफल रहा। भदोही के नमो साहू (14) और आयुष के आंख में दिक्कत थी, जिनका उपचार वाराणसी किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) इन बच्चों का ऑपरेशन वाराणसी, अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज, बदायु, लखनऊ में किया गया है। ऑपरेशन नि:शुल्क किए जाते हैं। योजना के तहत शून्य से 18 सात तक के बच्चों उपचार किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करे तो 2026 में 25 बच्चे क्लब फूड, 11 कटे ओठ, तालू के, आठ बच्चों के दिल में छेद़ था। वहीं 2025 में दिल के 11, ओठ 13, क्लब के 18, मोतियांबिंद, बहरापन के एक एक बच्चों का सर्जरी किया गया। इसी तरह 2024 में 19 बच्चे के क्लब फूड़, 10 ओठ, 06 दिल के मरीज सहित तीन बहरापन, चार मोतियांबिंद के बच्चों का ऑपरेशन कराया गया।
नौ बीमारी का होता है उपचार
- रीड़ के हड्डी में जन्मजात फोड़िया
- चेहरा, कान व हाथ का चिपटा होना
- कटा, ओठ, तालु,
- क्लब फूड टेढ़ा पंजा
- कुल्हा का ऊपर नीचे होना
- जन्मजात मोतियाबिंद
- जन्मजात बहरापन
- दिल में छेद़, सर का कम विकसित होना
- शिशुओं में रेटिना की बीमारी
वर्षवार आंकड़े
2026 - 44
2025 - 54
2026 - 46
अनुष्का फाउंडेशन तरफ से जिन बच्चों का पंजा टेड़ा है, उनका उपचार क्लब फूड के तहत किया जाता है। यह उपचार हर मंगलवार को ज्ञानपुर जिला अस्पताल में किया जाता है। एक बच्चे के उपचार पर करीब 1.5 से 2 लाख रुपये खर्च होता है। पांच साल तक इसका उपचार चलता है।
विक्रांत विश्वास अनुष्का फाउंडेशन के प्रोग्राम एक्जीटिव
आरबीएसके योजना के तहत जन्मजात बीमारी से ग्रसित बच्चों का उपचार किया जाता है। जरुरत पर पड़ने पर सर्जरी भी की जाती है। बीमारी की पहचान आरबीएसके की टीम, आशा, एएनएम करती है। प्रसव के दौरान बच्चे पर नजर रहती है।
डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही