ज्ञानपुर। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में छात्रों को अब एडमिशन के बाद नियमित विद्यालय आना होगा। 75 फीसदी से कम उपस्थिति वाले छात्रों को बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। यही नहीं जिन स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति की स्थिति ठीक नहीं होगी। वह विद्यालय भी 2026 की बोर्ड परीक्षा में केंद्र नहीं बनेंगे।
जिले में 38 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 120 वित्तविहीन माध्यमिक एवं इंटर कॉलेज हैं। इसमें करीब एक लाख 30 हजार विद्यार्थी पंजीकृत हैं। स्कूलों में पठन-पाठन बेहतर करने, विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति सही करने के लिए एक जुलाई से माध्यमिक स्कूलों में भी ऑनलाइन हाजिरी लगाने की पहल शुरू की गई है। धीरे-धीरे एक महीने से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन वित्तविहीन विद्यालयों में ऑनलाइन हाजिरी सिर्फ गिने-चुने में ही लग रही है। यह हालत पूरे प्रदेश की है। जिसको प्रभावी बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सख्ती शुरू की है। परिषद की ओर से सभी डीआईओएस को पत्र जारी किया है। इसमें कहा कि स्कूलों में 75 फीसदी से कम उपस्थित रहने वाले विद्यालय एवं छात्र-छात्राओं की सूची बनाई जाए। जिससे आगामी परीक्षा में उन पर सख्ती की जा सके। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब 75 प्रतिशत से कम अटेंडेंस वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। यह कदम छात्रों की पढ़ाई में अनुशासन लाने और ड्रॉप आउट रेट को कम करने के लिए उठाया गया है।
स्वामी विवेकानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोपीगंज के प्रधानाचार्य अजय त्रिपाठी ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रों की नियमित उपस्थिति से कक्षा का माहौल सुधरेगा और शिक्षक भी ज्यादा तैयारी के साथ पढ़ाने को प्रेरित होंगे। इस तरह की डिजिटल पहल से न केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी बल्कि छात्र और शिक्षक दोनों ज्यादा जिम्मेदार बनेंगे।