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आग बुझाने के साधन बिना कस्बे में चल रहे कालीन से जुड़े सैकड़ो कारखाने

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भदोही। भदोही नगर जिले का प्रमुख कस्बा है। शहर में कालीन बुनाई कारखाना, सूत कताई के कारखानों के अलावा बड़े बड़े कालीन प्रतिष्ठान हैं। जिनमे आए दिन अग्निकांड होना आम बात है। अग्निशमन विभाग की निगाहें बड़े बड़े प्रतिष्ठान में आग बुझाने का साधनों पर तो रहती हैं लेकिन मध्यम तबके से संचालित बुनाई और कताई कारखानों पर नहीं होती। जिससे आए दिन आगलगी की घटनाएं होती रहती हैं।
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शहर के गुलाम ईसापुर में बृहस्पतिवार को काटन ट्विस्टिंग कारखाने में आग लगने से लगभग डेढ़ करोड़ के सूत, जेनरेटर और मशीनरी इत्यादि जल कर भस्म हो गए। इस कारखाने में हर समय लाखों रुपये के काटन रखे होने के बाद भी अग्निशमन की व्यवस्था नहीं थी। खास बात यह है कि तीन तीन दमकल मौके पर आए फिर भी डेढ़ करोड़ का नुकसान हो गया।
यह शहर की पहली घटना नहीं थी। कुछ माह पूर्व पकरी तिराहे पर एक कारखाने में आग लगने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया था। इसी प्रकार थोड़ा और पहले जल्लापुर नई बस्ती में एक कारखाने में भी आग लगने की घटना लोगों को याद है। इन काखानों में भी आग बुझाने के साधन नहीं थे। लिप्पन तिराहे पर एक इलेक्ट्रानिक्स सामानों की दुकान थी जिसमे गत वर्ष फरवरी में आग से लाखो रुपयों के इलेक्ट्रानिक्स सामान जल गए थे। अग्निशमन विभाग का ध्यान केवल बड़े अस्पतालों, बड़े कालीन निर्यात प्रतिष्ठानों और होटलों पर रहता है। जबकि सूत कातने वाले कारखाने, बुनाई कारखाने, छोटे छोटे डाईंग हाउसों की ओर ना तो ध्यान दिया जाता है ना ही वहां अग्निशमन यंत्र लगाने के लिए जोर दिया जाता है। जबकि शहर क्षेत्र में लगभग 50 ऐसे कारखाने हैं जहां बुनाई का माल भी रखा होता है और बड़ी संख्या में बुनकर काम कर रहे होते हैं।
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