कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के विशेषज्ञों ने शनिवार को कुरमैचा गांव में किसानों को जागरूक कर धान की फसल में रोगों से रोकथाम के बारे में जानकारी दी। साथ ही परंपरागत खेती से हटकर कम लागत में मशरुम की खेती करने के लिए प्रेरित किया और उसके तरीके बताए। विशेषज्ञ मनोज पांडेय ने कहा कि प्रोटीनयुक्त मशरूम की मांग में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। मांग के अनुसार मशरूम की उपलब्धता तभी होगी जब किसानों की रुचि बढ़ेगी। 100 लीटर पानी में 15 किलोग्राम भूंसे को 50 ग्राम फार्मलीन, 10 ग्राम स्टीन डालकर उपचारित कर लें। 18 से 20 घंटे के बाद जब उपचारित भूंसे से पानी का टपकना बंद हो जाए तो उसे प्लास्टिक में भरकर छायादार स्थान पर फैला दें। 10 से 15 दिन के अंदर जब फैलाया गया भूंसा प्लास्टिक में ठोस हो जाता है तब उसमें अंकुरण निकलने लगते हैं।
उसी अंकुरण वाले भूंसे को कई प्लास्टिक में भरकर उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाएं। 15 दिन के बाद तीन इंच चौड़े छतरी वाले मशरुम को तोड़कर घर उपयोग लेते हुए आमदनी भी बढ़ाई जा सकेगी। वहीं कृषि विशेषज्ञ एके चतुर्वेदी ने कहा कि मौसम के साथ देने पर धान की फसल अच्छी है। अब बालियां लेने का समय आते ही तरह-तरह के रोगों का प्रकोप प्रभावी हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह पर रोगनाशक दवाओं का उपयोग कर फसल को बचाने में किसान सावधानी बरतें।