आषाढ़ तक सूखी गंगा में सावन में पानी हिलोरें मारने लगा है। बीते 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में तीन मीटर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बृहस्पतिवार सुबह जलस्तर 15 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, लेकिन दोपहर बाद घटकर पांच से छह सेमी प्रति घंटे पर आ गया।
करीब एक दशक से जुलाई में गंगा उफान पर रहती थी, लेकिन इस बार बारिश न होने से पानी की जगह बालू दिख रहा था। 13 वर्ष पूर्व वर्ष 2008 में भी जुलाई तक गंगा का जल स्तर इसी तरह काफी कम था। जबकि आम तौर पर इस सीजन में गंगा का जल स्तर उफान पर होता था। पहाड़ों और जगह-जगह हो रही बारिश का पानी गंगा में आने से मंगलवार रात से जल स्तर में वृद्धि शुरू हुई। बुधवार सुबह से जल स्तर के बढ़ाव ने तेज गति पकड़ी जो बृहस्पतिवार 11 बजे तक जारी रहा। जिसके चलते गंगा के जल स्तर में महज 24 घंटे में ही तीन मीटर से अधिक की वृद्धि हुई। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज कार्यालय से प्राप्त आंकड़े के अनुसार बुधवार को जल स्तर 67.460 मीटर दर्ज किया गया था जो बढ़कर बृहस्पतिवार को 70.530 मीटर पार कर गया। वर्ष 2020 में इस सीजन में जल स्तर 76 मीटर के पार था।
गंगा कटान प्रभावित छेछुआ और भुर्रा गंगा में गंगा कटान रोधी जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर को गंगा की बाढ़ के दौरान अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ेगा। गंगा कटान से किसानों की बर्बादी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने तीन करोड़ खर्च कर भुर्रा से छेछुआ तक के लगभग ढाई किलोमीटर क्षेत्र के गंगा नदी में जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर लगवाया है। पिछले दो माह पूर्व ही कार्य पूरा हो चुका है। अब गंगा का जल स्तर बढ़ने पर ही यह पता चल सकेगा कि कटान रोधी आधुनिक तकनीकी पर आधारित जिओ टेक्सटाइल ट्यूब कटर व्यवस्था गंगा कटान रोकने में कितना कारगर साबित होगा।