सीजेएम सबिहा खातून की अदालत ने आर्म्स एक्ट के मामले में 28 साल बाद वकील शुक्ला की पत्नी निर्मला शुक्ला समेत चार को दोषमुक्त कर दिया। वकील शुक्ला, उनकी पत्नी समेत पांच लोगों के खिलाफ 1997 में आर्म्स एक्ट मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में वकील शुक्ल पर रासुका भी लगाई गई थी। जिसे बाद में लखनऊ बोर्ड ने निरस्त कर दिया था।
गोपीगंज कोतवाली पुलिस ने 1997 में सूर्य नारायण शुक्ल उर्फ वकील शुक्ला समेत उनकी पत्नी निर्मला शुक्ला निवासी भवानीपुर औराई, श्रीकृष्ण तिवारी निवासी आनापुर, शिव प्रसाद तिवारी उर्फ डग्गर तिवारी गुदरीपुर, रामपुर घाट गोपीगंज और प्रदीप कुमार तिवारी निवाीस मूलापुर गोपीगंज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
आरोप था कि वकील शुक्ल ने पूरे जनपद में नागालैंड से लाइसेंस बनाकर वितरित किया और अपनी पत्नी के नाम से भी लाइसेंस बनाया है।
पुलिस ने सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस मामले की विवेचना कर रही थी। इस बीच चार अप्रैल 1999 को वकील शुक्ल की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद उनका नाम मुकदमे से बाहर हो गया। पुलिस ने उनकी पत्नी समेत अन्य के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। इसी मामले में सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों और सबूतों को ध्यान में रखकर सभी को दोषमुक्त कर दिया।