फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले के 1220 विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति लटकी

विज्ञापन
विज्ञापन
इंटरमीडिएट से लगायत उच्च व तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले 1220 विद्यार्थियों की उम्मीदों को झटका लगा है। बजट के अभाव में उनके शुल्क की भरपाई नहीं हो सकी है। इससे वे काफी परेशान हैं। मार्च 2022 में सात हजार आवेदकों में से 5843 को ही शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ मिल सका है। अब नए सत्र में दूसरे विद्यार्थियों के आने से पुराने छात्र-छात्राओं की शुल्क प्रतिपूर्ति मुश्किल है।
विज्ञापन

सामान्य, पिछड़ा और एससी वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण में दिक्कत न हो, इसलिए सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ देती है। पूर्व दशम यानि हाईस्कूल और दशमोत्तर यानि इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक, तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस को वापस की जाती है। वित्तीय वर्ष 2021- 22 में दशमोत्तर के सामान्य वर्ग के 7068 विद्यार्थियों का आवेदन अग्रसारित करने के लिए समाज कल्याण विभाग में भेजा गया। इसमें से सभी का आवेदन अग्रसारित कर दिया गया था, लेकिन 5843 विद्यार्थियों के खाते में 3.34 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि पहुंची। करीब 1220 विद्यार्थियों को अब तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। शुल्क प्रतिपूर्ति का पटल देखने वाले कर्मचारियों का कहना है कि कॉलेज से जितने आवेदन कार्यालय भेजे गए थे, उन्हें अग्रसारित कर दिया गया था। कॉलेज प्रशासन की उदासीनता के कारण तमाम विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल सका है। जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार यादव का कहना है कि कॉलेज में आने वाले आवेदन पत्रों को अग्रसारित कर दिया गया है। विभाग से किसी का अग्रसारण नहीं रोका गया। बजट नहीं होने के कारण 1220 विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ नहीं मिल सका होगा। उधर, सामान्य, पिछड़ा और एससी वर्ग के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों का डाटा संदिग्ध होने से उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल सका है। वर्ष 2021 में इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक व तकनीकी शिक्षा ग्रहण कर रहे 18 हजार से अधिक विद्यार्थियों की ओर से आवेदन किया गया था। इनमें से 15 हजार को शुल्क प्रतिपूर्ति औैर छात्रवृत्ति का लाभ मिल गया है, लेकिन एक हजार के खाते में पैसा नहीं आया है। समाज कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के लोगों का कहना है कि विद्यार्थियों के प्रमाणपत्र में खामियां होने से दिक्कत हुई है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी अजय सिंह का कहना है कि विद्यार्थियों को त्रुटियों में सुधार का मौका दिया गया। इससे तीन हजार विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिल गया, लेकिन एक हजार के खाते में रकम नहीं आई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें