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शराब और फास्टफूड के ज्यादा सेवन से खराब होती है किडनी : डॉ. एसके पासवान

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ज्ञानपुर। शराब और फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से किडनी की बीमारी होती है। किडनी की बीमारी होने पर घरबराए नहीं, इसका इलाज संभव है। यह कहना है 100 शय्या अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके पासवान का। उन्होंने बताया कि किडनी की बीमारी से बचने के लिए दिनचर्या नियमित करना बहुत जरूरी है। किडनी खराब होने पर नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। किडनी ट्रांसप्लांट भी एक उपचार है। किडनी ट्रांसप्लांट होने पर मरीज 20 से 25 साल तक जीवित रहता है।
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किडनी बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल मार्च महीने के दूसरे बृहस्पतिवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। इस दिन बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है। जिले के 100 शय्या अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में इस समय 88 मरीजों का डायलिसिस हो रही है। यूनिट में 13 बेड पर 88 मरीजों की डायलिसिस चल रही है। नेफ्रोलॉस्टि की सलाह पर मरीज का डायलिसिस सप्ताह में एक या दो दिन की जाती है। एक मरीज का डायलिसिस करने में करीब साढ़े तीन घंटे का समय लगता है। इसके बाद 30 मिनट तक मशीन की सफाई होती है। फिर दूसरे मरीज की डायलिसिस की जाती है। जिलाधिकारी डीएचएस की बैठक में हर महीने डायलिसस की समीक्षा करते हैं। सौ शय्या अस्पताल में इकलौता डायलिसिस यूनिट ही है। यहां जनपद के अलावा वाराणसी, जौनपुर, प्रयागराज के मरीज डायलिसिस कराने आते हैं। विश्व किडनी दिवस के दिन यूनिट पर मरीज व तीमरदारों को बीमारी के प्रति जागरुक किया जाता है।
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डायलिसिस यूनिट में नेफ्रोलॉस्टि नहीं
जिले में डायलिसिस यूनिट तो संचालित है, लेकिन यहां नेफ्रोलॉस्टि की तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी होती है। डायलिसिस कराने वाले मरीजों को नेफ्रोलॉस्टि को दिखाने लिए वाराणसी और प्रयागराज जाना पड़ता है। डायलिसिस यूनिट में भदोही के 65 मरीज हैं। इसके अलावा जौनपुर के 16, प्रयागराज के पांच और वाराणसी के दो मरीज डायलिसिस कराने आते हैं। इन मरीजों का शिफ्टवार डायलिसिस होती है।
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