नगर के गौरियाना मोहल्ले में शुक्रवार की रात जश्ने गौसुल वरा कांफ्रेंस किया गया है। अल अक्सा कमेटी की ओर से हुए इस कांफ्रेंस में मौ. मुफ्ती निजामुद्दीन रिजवी मिस्बाही ने कहा कि मजहबे इस्लाम महिलाओं और पुत्रियों के अधिकारों को बेहद अहमियत है। इसे पूरा करना हर मुसलमान पर फर्ज बनता है।
मौलाना ने कहा कि हमें चाहिए न केवल इस पर अमल करें बल्कि कौम के लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करें, ताकि लोगों को इसकी जानकारी हो। कहा कि दूसरे कौम में हमारे दीन में महिलाओं के अधिकारों को लेकर संशय है। बहुत से लोग समझते हैं कि इस्लाम में बेटियों का मतलब केवल घर का काम करने से होता है। जबकि ऐसा नहीं है। इसलिए इस्लाम के अलमबरदारों से उम्मीद है कि इन जानकारियों को दूसरे अन्य से साझा करेंगे। मौ. सैयद शाने आलम ने कहा कि बच्चों को इल्म देकर इस्लामी सांचे में ढालों, आज मुसलमान काम और दौलत के पीछे इतना भाग रहा है कि वह बेटियों को पढ़ाना भूल गया। यही कारण है कि इस्लामी लड़कियां तालीम हासिल करने में पीछे है। मौ. जहीर अहमद ने कहा कि बेटी को पढ़ाओगे तो वो अपने बच्चों को पढ़ा लेगी। कांफ्रेंस में शायर सैय्यारा कमर, शायर बेलाल रजा, अमन शाकिर ने नाते नबी पढ़ कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कांफ्रेंस की अध्यक्षता हाफिज परवेज अच्छे और हाफिज अशफाक रब्बानी ने, संचालन हाफिज आबिद हुसैन ने किया। मौलाना मुफ्ती जाकिर हुसैन, हाफिज व मौलाना अरफात हुसैन, हाफिज अली रजा और हाफिज कारी फहद अत्तारी मौजूद रहे।