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डॉक्टरों की मनमानी और दवाओं की कमी से मरीजों की जेब हो रही खाली

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महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर। - फोटो : BHADOHI
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सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बाहर की दवा न लिखी जाए। उन्हें अस्पताल से ही दवा मिले। इसके लिए शासन ने स्पष्ट निर्देश भी दिया है। बावजूद इसके जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कहीं डॉक्टरों की मनमानी तो कहीं कुछ दवाओं की कमी की वजह से मरीजों की जेब ढीली हो रही है। बावजूद इसके अधिकारी मौन हैं।
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बीते दिनों जिले के दौरे पर आए विंध्याचल मंडल के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी व दो अन्य मंत्रियों ने एक सीएचसी में पहुंचकर अधिकारियों को फटकार भी लगाया था। वहां लोगों ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की थी। बावजूद इसके स्थिति सुधरी नहीं है। मंगलवार को जिले के विभिन्न अस्पतालों की पड़ताल की गई तो पता चला कि कमीशनखोरी के चक्कर में मरीजों की जेब ढीली हो रही है।
महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर और महाराजा बलवंत चिकित्सालय यहां का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है। महाराज चेत सिंह चिकित्सालय में यहां के डॉक्टर और सीएमएस तो सभी दवा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन दवा बाहर की लिखी जा रही है। मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे ज्ञानपुर से पत्नी का दांत दिखाने पहुंचे एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसे डॉक्टर ने कुल छह दवा लिखी थी। जिसमें से एक अंदर मिली, बाकी सब बाहर की ही पर्ची थी। जो दवा बाहर मिलती है उसकी अलग ही पर्ची बनती है। यहीं हाल महाराज बलवंत सिंह चिकित्सालय का है। यहां महिलाओं की ब्लीडिंग रोकने वाली ट्राईनेक्सा टैबलेट और विटामीन सी की दवा नहीं है। ऐसे में मरीजों केे बाहर से लेना पड़ रहा है। सीएचसी डीघ में एंटी रैबीज इंजेक्शन का सिरिंज नहीं है। यहां आए सूरज ने कहा कि बाहर से खरीदकर लगवाना पड़ा है।
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कमीशन के खेल में पीसते हैं मरीज
एक मरीज ने बताया कि मेडिकल स्टोर पर जब दवा लेने जाते हैं तो उनसे डिस्काउंट की बात करते ही मेडिकल वाले कहते हैं कि जब तुम्हें छूट दूंगा तो वहां पर बैठे लोगों केे क्या दूंगा। इस लिए यहां छूट मिलने की व्यवस्था नहीं है। मरीज के साथ आए तीमारदार ने बताया कि अस्पताल से दो पर्चा बनाया जाता है। एक रुपये में पर्ची कटाई जाती है, जिसपर चिकित्सक अस्पताल की दवा लिखी जाती है। प्राइवेट दवा लिखने के लिए एक अलग से चुटका दिया जाता है।
केस-1, बाहर से खरीदा दवा
महाराजा चेत सिंह अस्पताल में आए अलुआ गांव निवासी विनोद ने बताया कि आंख में धूल चली गई थी, जिससे दिक्कत हो रही थी, जिला अस्पताल में आंख के डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बाहर की दवा लिखी। बताया कि 398 रुपये की बाहर से दवा लिया हूं। दवा काउंटर पर जाने के बाद सिर्फ एक दवा मिली और बोला गया दवा नहीं है।
केस-2, 260 रुपये में खरीदी बाहर से दवा
शिव नायक (3) मूल निवासी नेदुला जंघई का है। अपने मामा के घर कटेवना आया है। तीन दिन पहले बच्चे की तबियत खराब हो गई, जिला अस्पताल में दिखाया था, उस समय 360 रुपये की बाहर से दवा लिखी गई थी। उसके बाद मंगलवार को जब दोबार दिखाने आए तो 260 रुपये की दवा बाहर से लाए। शिवनायक के मामा राजनाथ ने बताया कि महाराजा चेत सिंह अस्पताल में कुछ दवा बाहर की लिखी है।
दो दवाओं को छोड़कर बाकी सभी दवाएं हैं। महिलाओं में ब्लीडिंग रोकने वाली ट्राईनेक्सा टैबलेट नहीं है जबकि इंजेक्शन उपलब्ध है। दूसरी दवा विटामिन- सी की गोली भी अस्पताल में खत्म है। इन दोनों दवाएं के लिए अनिवार्य रूप से मरीजों को जन औषधि केंद्र भेजा गया, जहां दवाएं सस्ती मिलती हैं।
- डॉ. संजय तिवारी सीएमएस, एमबीएस।
अगर अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं और चिकित्सक बाहर की दवा लिखते हैं तो गलत है। अस्पताल में सारी दवाएं उपलब्ध हैं। जो बाहर की दवा लिख रहे हैं उन्हें चेतावनी दी जाएगी।
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- डॉ. राजेन्द्र कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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