सोमवार की देर शाम तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने बिजली व्यवस्था को बेपटरी कर दिया। कहीं तार टूटे तो कहीं खंभे गिर गए। जिससे जिले के कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित रही। विभागीय कर्मियों के प्रयास से करीब 20 घंटे के बाद मंगलवार की दोपहर में आपूर्ति बहाल हो सकी। सबसे ज्यादा दिक्कत वितरण खंड प्रथम फत्तूपुर के पारेषण लाइन में आई खराबी को लेकर हुई।
धूल भरी आंधी ने चंद मिनटों में दुकानों के सामने लगे टिनशेड, रिहायशी छप्पर, मड़हे, बिजली खंभे को गिरा दिया था। कई स्थान पर हरे पेड़ों के तारों पर गिरते ही बिजली व्यवस्था ठप थी। सड़कों पर राहगीरों, वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ी थी। लगभग आधे घंटे बाद आंधी, बारिश का क्रम रुकने पर स्थिति सामान्य हो सकी। टूटकर गिरे तार, खंभे की जानकारी मिलने पर विद्युत विभाग ने भोर तीन बजे मुख्यालय समेत कुछ उपकेंद्र से जुड़े गांवों में आपूर्ति बहाल किया था। नगर क्षेत्र में वोल्टेज सही होने पर एसी, फ्रिज, कूलर, पंखे चले लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था भी नहीं मिल सकी। अधिशासी अभियंता प्रथम अभिषेक यादव ने कहा कि आंधी, बारिश से वितरण खंड फत्तूपुर के 33 हजार की पारेषण लाइन में खराबी आई थी जिसे ठीक कराकर क्षेत्रों में टूटे और जले उपकरणों को बदलवाया जा रहा है।
उपकरणों के टूटने से 10 लाख की चपत
मौसम विभाग की चेतावनी पर भी विद्युत विभाग जर्जर उपकरणों को बदलने को महत्व नहीं दिया। सोमवार को देर शाम आंधी, बारिश ने लगभग 10 लाख की चपत लगाकर विभागीय परेशानी बढ़ा दी है। अधिशासी अभियंता सदर अमर सिंह ने बताया कि टूटे-फूंके उपकरणों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
इन क्षेत्रों में गुल रही बिजली
मई के अंतिम सप्ताह में प्रकृति का मिजाज जब-जब बिगड़ता है तब-तब कोनिया वासियों की सबसे अधिक परेशानी बढ़ती है। सीतामढ़ी उपकेंद्र के बारीपुर, सीतामढ़ी फीडर पर 18 किलोमीटर में रहने वाले उपभोक्ताओं को दो दिन से अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है। कटरा निवासी रमजान अली, मनोज आदि ने कहा कि ट्रांसफार्मर जलने के एक सप्ताह बाद बिजली न मिलने से पेयजल की समस्या बढ़ गई। अधिशासी अभियंता सदर अमर सिंह ने कहा कि तकनीकी कर्मचारी समस्या को दूर करने में लगे हैं।