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रोक के बावजूद बढ़ा अवैध पटाखों का निर्माण और भंडारण

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इसे पुलिस की सुस्ती कहें या अवैध पटाखा का कारोबार करने वालों की मनमानी। पुलिस की लाख सतर्कता और ताकीद के बाद भी कालीन नगरी भदोही में अवैध पटाखों का निर्माण और भंडारण साल दर साल बढ़ता ही रहा है। दशहरा और दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही अवैध कारोबार में तेजी आ जाती है। हालांकि पुलिस एक-दो मामलों में कार्रवाई भी करती है, लेकिन इसके कुछ दिन बाद अवैध कारोबार फिर शुरू हो जाता है। पूर्व में हुई घटनाएं तो यही कह रही हैं।
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वर्ष 2016 में ज्ञानपुर के पुरानी बाजार में पटाखों में विस्फोट से चार लोग झुलस गए थे। नवंबर 2017 को भदोही नगर के दरोपुर में पटाखा बनाने वाले मकान में विस्फोट से एक युवक की मौत हो गई थी। 23 फरवरी 2019 का वह दिन किसे याद नहीं, जब चौरी थाना क्षेत्र में कालीन कंपनी की आड़ में अवैध पटाखा बनाने का कारोबार हो रहा था। उसी समय ऐसा विस्फोट हुआ कि 13 लोगों की जान चली गई। जून 2021 में गोपीगंज कोतवाली क्षेत्र में एक मकान में विस्फोट हुआ और एक व्यक्ति घायल हो गया। घर के शीशे के साथ ही बाउंड्रीवाल तक टूट गई थी। हाल के दिनों में सुरियावां पुलिस ने करीब एक क्विंटल विस्फोटक पकड़ा। जांच में पता चला कि विस्फोटक से पटाखा बनाने की तैयारी थी। उसके दो-तीन दिन के बाद ही सुरियावां के ही एक मोहल्ले में विस्फोट भी हो गया, गनीमत रही कि घटना में जन हानि नहीं हुई।
पूर्व की घटनाओं के मद्देनजर सभी थाना प्रभारियों को जांच के लिए कहा गया है। दीपावली से पूर्व अवैध तरीके से पटाखा बनाने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. अनिल कुमार, एसपी भदोही
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जिले में हैं 24 लोगों को जारी है लाइसेंस
पटाखा का कारोबार करने के लिए अग्निशमन विभाग ने कुल 24 लोगों को लाइसेंस जारी किए हैं। अग्निशमन अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि विभाग पूरी टीम के साथ विस्फोटक के अवैध भंडारण, बिक्री पर रोक लगाने के लिए सक्रिय है। इनमें पटाखा बेचने वालों की संख्या 11 है और निर्माण कर बेचने वालों की संख्या 13 है।
शिक्षकों ने बच्चों को बताए बचाव के उपाय
गिरधरपुर प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में बुधवार को प्रधानाध्यापक लता वर्मा, शिक्षक अजय कुमार, रुचि तिवारी ने बच्चों को पटाखों से बचाव के उपाय बताए। लता वर्मा ने कहा कि पटाखा एक विस्फोटक पदार्थ है, जिससे दूर रहने से जीवन सुरक्षित रहेगा। पर्व एवं त्योहार समाज में भाईचारे की कमी पूरी कर आपसी नजदीकियां भी बढ़ाते हैं। पटाखा में नाजायज खर्च मात्र दिखावापन है। पटाखों के स्थान पर खेल, शिक्षा, खानपान की व्यवस्था करने से पूरा परिवार खुशहाल होगा। वायु मंडल में प्रदूषण भी कम होगा। किसी गरीब परिवार के साथ पर्व की खुशी मनाने पर उस परिवार की जरूरत भी पूरी हो जाती है।
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