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कोरोना महामारी कालीन उद्योग पर भारी: चीन की मनमानी से करोड़ों के माल डंप, निर्यातकों ने लगाई सरकार से गुहार

Sun, 18 Jul 2021 09:22 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, भदोही

सार

कालीन उद्योग के सामने नई समस्या यह आ रही विदेशों को माल भेजने के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं। कालीन निर्यातकों ने बताया कि इसमें चीन मनमानी कर कर रहा है। चीन ने वेसल भाड़ा तीन गुना तक बढ़ा दिया है। 
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भदोही के कालीन निर्यातक परेशान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना महामारी कालीन उद्योग पर भारी पड़ रहा है। एक ओर जहां दो वर्ष से भारत में अंतरराष्ट्रीय मेलों का आयोजन नहीं हो सका है। वहीं विदेशों में होने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मेले भी प्रभावित हुए हैं। अब नई समस्या यह आ रही विदेशों को माल भेजने के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं। जो वेसल ऑपरेटर माल उठा भी रहे हैं वो दो से तीन गुना तक कीमत वसूल रहे हैं। कालीन निर्यातकों ने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय से पहल करने की मांग की है।

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कोरोना काल से पहले अमरीका के लास एंजेल्स या न्यूयॉर्क के लिए 40 फीट के एक कंटेनर का भाड़ा चार  हजार डॉलर था। आज वही आठ हजार से 10 हजार डॉलर तक वसूला जा रहा है। वेसल ऑपरेटर ऊंची कीमत में माल उठा भी रहे हैं तो इसके लिए काफी लंबा इंतजार भी करा रहे हैं। इससे निर्यातकों की नींद उड़ गई है। इस बारे में कालीन निर्यातकों ने बताया कि इसमें चीन मनमानी कर कर रहा है।

चीन ने वेसल भाड़ा तीन गुना तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा एक और समस्या यह है चीन से भारत का आयात घटता जा रहा है जिससे चीन से काफी कम संख्या में कंटेनर भारत पहुंच रहे हैं। 
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एक शिपिंग व्यवसायी ने तो बताया कि  वेसल आपरेटर्स विदेशी हैं। वे बढ़ी कीमत मिलने पर भी समय से माल नहीं उठा रहे हैं। माल उठवाने में चीन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यहां तक की खाली कंटेनरों को चीन भेज दे रहे हैं।

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ऑल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के पूर्व मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने बताया कि एक प्रकार से देखा जाए तो वेसल आपरेटर्स ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं। हमारा माल कई कई दिनों तक पड़ा है उसके लिए कंटेनर नहीं मिल रहा है और जो तीन गुना कीमत दे रहा है उसको प्राथमिकता दे रहे हैं।

ऐसी स्थिति में भारी मात्रा में माल बंदरगाहों पर कंटेनरों की उपलब्धता का इंतजार कर रहे हैं। प्रमुख कालीन निर्यातक आलोक बरनवाल ने कहा कि इसमें भारत सरकार वाणिज्य तथा कपड़ा मंत्रालय को तत्काल हस्तक्षेप करना होगा। नहीं तो हमारे माल पोर्ट पर डंप रहेंगे जिससे भविष्य में भारतीय कालीन निर्यात को नुकसान होगा। 
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