आल इंडिया कारपेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) पदाधिकारियों ने कालीन निर्यातकों के कस्टम्स से संबंधित डेटा चोरी होने पर चिंता जताई है। थर्ड पार्टी साईबर एकस्पर्ट ये डेटा पूछ कर 1500 रुपये में प्रतिस्पर्धी व्यवसाईयों को बेच रहे हैं। यदि इस पर केंद्रीय वाणिज्य और वस्त्र मंत्रालय ने रोक न लगाई तो निर्यातकों के साथ राष्ट्र की भी भारी क्षति होगी। एकमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेज कर वास्तु स्थिति से अवगत कराते हुए जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
सामान्य तौर पर कोई कालीन निर्यातक किस देश के किस आयातक को क्या बेच रहा है यह उसके लिए गोपनीय डेटा होता है। वह कभी नहीं चाहेगा कि किसी दूसरे निर्यातक अथवा उसके प्रतिद्वंद्वी को यह जानकारी मिले। जिले में कालीन उत्पादन केंद्रों पर तो इतनी गोपनीयता बरती जाती है कि कोई एक दूसरे निर्यातक के उत्पादन केंद्रों तक नहीं आ-जा सकता। हालांकि इस मामले में कालीन निर्यातक और उत्पादक एक दूसरे का सम्मान करते हैं।
एकमा के मानद सचिव असलम महबूब ने सोमवार को बताया कि उन्हें आश्चर्य तो तब हुआ जब उन्हें खुद अपने ही फर्म का डेटा आनलाईन मिल गया। माल कहां और किसको तथा कितने में बेचा जा रहा है यह भी आनलाईन चंद रुपये लेकर बताए जा रहे हैं। उन्होने कहा कि इसका खुलासा होने के बाद से इंडस्ट्री के लोगों की नींद उड़ गई है। कहा, यहां हर कोई अपनी व्यवसायिक जानकारी भले ही गोपनीय रख रहा हो लेकिन वास्तव में कुछ भी छिपा नहीं है। साईबर अपराधी इंडस्ट्री और राष्ट्र को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
मानद सचिव ने कहा कि इस आशय की लिखित शिकायत पीएम से करते हुए मांग की है कि साईबर क्राइम विभाग से इसकी जांच कराकर न केवल इस पर रोक लगाया जाए बल्कि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।