बलिया। बलिया के बाटी चोखा की अलग पहचान है। बाटी में पड़ने वाले बलिया के सत्तू का अलग ही महत्व और स्वाद है। चने के सत्तू को खाने में कई तरह से उपयोग किया जाता है। प्रशासन ने बलिया के चने सत्तू को ओडीओपी (एक जनपद एक उत्पाद) में शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है, जिस पर प्रमुख सचिव लघु एवं सूक्ष्म उद्योग ने सर्वे के लिए टीम जल्द जिले में भेजने का आश्वासन दिया है। इसके लिए जिले में चने की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक भी किया गया है।
चने की खेती का बढ़ेगा दायरा
सत्तू को ओडीओपी के शामिल करने के लिए प्रशासन हर एंगल से काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए चने की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई गई है। अभी तक जिले में 3478 हेक्टेयर में चने की खेती होती थी। इस सत्र में इसका टारगेट 10 हजार हेक्टेयर में किया गया है। इसके लिए कृषि विभाग की तरफ से बड़े किसानों को मुफ्त चने का बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा।
मध्य प्रदेश से आता है जिले में चना
बलिया में चने की खेती का दायरा लगातार कम होने से मध्यप्रदेश से व्यापारी चना लाकर उससे सत्तू तैयार कर बेचते हैं। उसमें बलिया के देसी चने जैसा स्वाद नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए चने की खेती पर प्रशासन पूरा जोर लगा रहा है।
किसानों को ऐसे होगा मुनाफा
एक हेक्टेयर खेती में किसानों की 30-40 हजार रुपये का खर्च आता है। एक हेक्टेयर में 25-30 कुंतल चना की उपज हो जाती है। जिले के सात समूहों के पास भूनने की मशीन व इलेक्ट्रानिक चक्की है, जिस पर चने को पीसा जा सकता है। एक किग्रा चना में 7.5 ग्राम सत्तू तैयार होगा। सत्तू की कीमत 115 से 125 रुपये प्रति किग्रा है। ऐसे में किसानों को चार माह में एक हेक्टेयर में तीन लाख से अधिक का चना बेच सकते हैं। इसके अलावा फसल बीमा का लाभ भी शासन की तरफ से किसानों को मिलेगा। छोटे-छोटे कई उद्योग संचालित होने लगेंगे।
चने के सत्तू को ओडीओपी में शामिल करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रमुख सचिव लघु एवं सूक्ष्म उद्योग द्वारा गठित टीम सर्वे के लिए जल्द जिले में आएगी। किसानों को चने की खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। 10 बड़े किसान इसकी तैयारी में जुटे हैं। ओडीओपी में शामिल हो जाने के बाद कई लोगों को रोजगार मिलेगा। - ओजस्वी राज, मुख्य विकास अधिकारी।