ज्ञानपुर। प्रसव पीड़ा में परेशान प्रसूता को तुरंत स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सरकार ने 102 एंबुलेंस की व्यवस्था की है, लेकिन, अक्सर यह सुविधा मरीजों को समय पर नहीं मिल पाती। लंबे समय के प्रयास के बाद संपर्क भी होता है तो प्राय: बताया जाता है कि गाड़ी अभी किसी पेसेंट को लेकर गई है, थोड़ा समय लगेगा। ऐसे में मजबूर होकर लोगों को निजी साधन का सहारा लेना पड़ता है। कई बार यह साधारण परिवारों के लिए भारी पड़ता है।
जिले की 16 लाख की आबादी में दो जिला अस्पताल, पांच सीएचसी और 16 पीएचसी संचालित हैं। इसके अलावा 20 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र और एएनएम सेंटर भी चल रहे हैं। मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए 108 और 102 एंबुलेंस भी शासन की ओर से लगाई गई हैं, जिनमें प्रसूताओं के लिए 102 यानी खुशियों की सवारी चल रही है। जिले में 41 एंबुलेंस में 21 वाहन 108 हैं, जबकि 20 एंबुलेंस 102 की हैं। एमबीएस भदोही, एमसीएच ज्ञानपुर में चार-चार जबकि सीएचसी गोपीगंज, सुरियावां औराई में दो से तीन एंबुलेंस तैनात हैं। डीघ सीएचसी में दो एबुुलेंस की सुविधा है, लेकिन वह काफी पुरानी हो चुकी है। इससे कटरा-कोनिया आदि क्षेत्रों के गंभीर रूप से बीमार प्रसूताओं को समय से उपचार नहीं मिल पाता। अक्सर सुनने में आता है कि फोन करने के आधे से एक घंटे बाद एंबुलेंस पहुंचती है तब तक मरीज की जान मुश्किल में रहती है। इससे कभी कभार समय से उपचार न होने पर बच्चे गर्भ में ही मृत हो जाते हैं। यही कारण है कि 2019 में 42 नवजातों की जन्म के बाद मौत हुई, जबकि 159 गर्भ में ही मर गए। एंबुलेंस प्रभारी रवि सिंह ने कहा कि जिले में कुल 41 एंबुलेंस संचालित हैं, जिनमें 12 एंबुलेंस काफी पुरानी हो चुकी हैं। कुछ नई एंबुलेंस की मांग की गई है।