आदर्श आचार संहिता प्रभावी होने से सभी अधिकारी, कर्मचारी चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यस्तता से आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए किए गए करीब एक हजार ऑनलाइन आवेदन लंबित हैं। हालांकि ज्यादातर आवेदन अभी समयसीमा के भीतर ही हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने, छात्रवृत्ति, नौकरी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। इसके लिए अभ्यर्थियों की ओर से ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। हल्का लेखपाल की ओर से उसका सत्यापन कर उच्चाधिकारी के पास भेजा जाता है, लेकिन आठ जनवरी को विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद प्रशासन चुनावी मोड में आ गया है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सुबह से लेकर शाम तक तैयारी में जुटे हैं। मतदाता पहचान पत्र भेजने, प्रशिक्षण संग अन्य कार्य निपटाए जा रहे हैं। काम की अधिकता के कारण कई अधिकारी तो प्रमाणपत्रों से जुड़े आवेदन पत्रों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। ज्ञानपुर तहसील में आय-जाति के 100 और निवास के 50 आवेदन लंबित है। तहसीलदार सदर विजय यादव ने कहा कि छात्र-छात्राओं से जुड़े आवेदनों का निस्तारण प्राथमिकता से किया जाता है। औराई तहसील में 31 दिसंबर के बाद से आय-जाति के 300 और निवास के 250 मामले लंबित हैं। आवेदन तिथि से आय और जाति का निस्तारण 20 दिन में और निवास का 15 दिन में हो जाना चाहिए, लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसा होता नहीं है। भदोही तहसील में आय-जाति व निवास के 350 आवेदन लंबित है।
सुरियावां के अर्जुनपुर निवासी संतोष यादव ने बताया कि 22 जनवरी को आय व जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अब तक उसका निस्तारण नहीं हो सका। आवेदन तहसीलदार के पोर्टल से दूसरे लेखपाल के पोर्टल पर चला गया। वह अभी घूम रहा है। यदि यहीं स्थिति रही तो विलंब हो सकता है।
अभोली के जगदीश कुमार ने बताया कि शुल्क प्रतिपूर्ति का फार्म भरने के लिए आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया। अब तक निस्तारण नहीं हो सका। दो बार तहसील भी जा चुके हैं लेकिन प्रमाणपत्र नहीं मिला।
आय-जाति और निवास प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों का 15 से 20 दिन के अंदर निस्तारण हो जाता है। छात्र-छात्राओं से जुड़े आवेदन लंबित नहीं रहते। चुनाव ड्यूटी के कारण एकाध मामलों में दिक्कत आई होगी। निस्तारण के लिए निर्देश दिया जाएगा।- शैलेंद्र मिश्र, एडीएम