लगभग एक माह बाद भी लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर बजट न मिलने के कारण 150 ग्रामीण सड़कों की हालत खराब हो चुकी है। गड्ढों को नहीं भरे जाने के कारण राहगीरों, वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डीघ ब्लाक के गोधना से चंदापुर, अभोली ब्लाक के शेरपुर से गोपलहां, दानूपुर से मतेथू बाजार की सड़क की हालत तो और ज्यादा खराब है।
गोधना-चंदापुर सड़क की दुर्दशा पर राहगीर सुशील कुमार, मनीष, शिवपूजन ने कहा कि लगभग 10 वर्ष पहले इसका निर्माण लोक निर्माण ने कराकर कोनिया क्षेत्र तक की राह आसान किया था। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-हंडिया रेल खंड पर दोहरीकरण कार्य होने के कारण ओवरलोड सामानों की ढुलाई वाहनों से होने पर सड़क खराब हो गई। उक्त सड़क के किनारे गंदे पानी का बहाव होने से राहगीरों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हल्की बारिश होने पर सड़क पर हुए गड्ढों में भर जाता है। इससे आवागमन करने वालों की परेशानी और बढ़ जाती है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसबी राव का कहना है कि बीते दिसंबर माह में सड़कों की मरम्मत के लिए दो करोड़ रुपये की मांग शासन से की गई है, जो अभी तक नहीं मिल सकी है। बजट मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
उधर, शिकायत के बाद भी विभाग क्षतिग्रस्त सड़कों की सुध नहीं ले सका है। शेरपुर-गोपलहां से ज्ञानपुर मुख्यालय, अभोली, सुरियावां, दुर्गागंज, सरायकंसराय, जंघई समेत पड़ोसी जिलों को जाने वाले वाहन चालक सुरेश कुमार, अभयचंद, कृपाशंकर ने बताया कि सड़क पर छोटे-बडे़ गड्ढे हैं। सड़क खराब होने से यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मतेथू बाजार से दानूपुर तक जुड़ने वाली लगभग चार किलोमीटर सड़क को तीन माह पूर्व चौड़ीकरण की योजना में शामिल कराकर विभाग ने गिट्टी भी गिरवा दी, लेकिन मरम्मत कार्य नहीं होने से खास तौर से विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। साइकिल से चल पाना भी मुश्किल हो रहा है। क्षेत्रवासी बाबूनंदन, शिवनारायण, सरयूनाथ, महेंद्र कुमार ने बताया कि जिम्मेदारों से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत की मांग करने किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। सूफीनगर हाईवे से जंगीगंज रेलवे स्टेशन, गोपीगंज-पड़ाव से केड़वरिया, ऊंज से कुरमैचा, वहिदानगर से रजमला, सुरियावां बाईपास से भदोही, वाराणसी, जौनपुर, मछलीशहर आदि स्थानों तक जाने वाली सड़कें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। बीते साल अक्तूबर से 15 दिसंबर तक चले अभियान के दौरान 365 में 215 सड़कें ही गड्ढामुक्त हो सकीं। हालांकि इनमें से भी अधिकांश सड़कों की मरम्मत की सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गईं। अन्य 150 सड़कों की तो मरम्मत भी नहीं हो सकी। इन सड़कों की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है।