ज्ञानपुर। कामर्शियल बाइक के रजिस्ट्रेशन के दो साल पहले जारी शासनादेश से एआरटीओ विभाग के अधिकारी ही अनजान हैं। इससे हर साल परिवहन विभाग को लाखों का घाटा उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि परिवहन विभाग की ओर से न तो इसके खिलाफ कभी चेकिंग अभियान चलाया गया और न ही कामर्शियल बाइक का कोई रजिस्ट्रेशन हुआ। हद तो तब हो गई जब साहब ने कामर्शियल बाइक के टैक्स और फिटनेस की जानकारी पर अनभिज्ञता जताई।
दिसंबर 2016 में प्रदेश सरकार ने बाइक के दुरुपयोग को देखते हुए दो कटेगरी निर्धारित की थी। इसके बाद बाइक के कामर्शियल उपयोग के संबंध में शासनादेश जारी किया था। इसके तहत बाइक को ब्रेड, बिस्कुट आदि की डोर टू डोर डिलीवरी के साथ ही फास्ट फूड की होम डिलीवरी और ऑनलाइन खरीदारी के बाद सामान की डिलीवरी, दूधिए, कूरियर आदि में प्रयोग करने पर उसे कामर्शियल कटेगरी में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद परिवहन विभाग के अधिकारियों को चेकिंग अभियान के तहत धर पकड़ कर बाइक का कामर्शियल रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया था। जिले में सौ से ज्यादा जगहों पर बाइक का कामर्शियल प्रयोग हो रहा है। बाइक का कॉमर्शियल प्रयोग करने वालों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाकर कॉमर्शियल रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश के बावजूद विभाग उदासीन बना रहा। शासनादेश के दो साल बीतने के बावजूद अब तक न तो कभी विभाग की तरफ से इसके खिलाफ अभियान चलाया गया और न ही एक भी बाइक का कामर्शियल रजिस्ट्रेशन कराया जा सका। नियमानुुसार कामर्शियल बाइक का हर तीसरे महीने तीन सौ रुपये का अतिरिक्त टैक्स और फिटनेस की जांच जरूरी है। इस संबंध में पूछने पर एआरटीओ सत्येंद्र कुमार यादव ने कामर्शियल बाइक के टैक्स और फिटनेस की जानकारी से अनभिज्ञता जताई। कहा कि राजनीतिक दबाव और कोर्ट में कॉमर्शियल साबित करने के झंझट के चलते कामर्शियल बाइक के खिलाफ चेकिंग अभियान कम चलाया जाता है।