रुधौली। छपिया शिवबरन में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास राघव ऋषि ने कहा कि महालक्ष्मी की आराधना से सर्वांगीण सुख मिलता है। भक्ति को बढ़ाने के लिए कुछ समय पवित्र स्थल पर महालक्ष्मी आराधना करो तभी वे हमारी रक्षा करेंगी।
राघव ऋषि ने कहा कि महालक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं। उनमें एक स्वरूप मृत्युलोक के लिए निर्धारित है। चार ग्रहों बुध, बृहस्पति, शुक्र व शनि का संचालन महालक्ष्मी करती हैं। इसी आराधना को भगवान श्रीराम व कृष्ण ने किया। आराधना का प्रारंभ श्रीदीक्षा में श्रीमंत्र ग्रहण करने से होता है। इसी आराधना के बल पर कभी भारत सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। सौरभ ऋषि ने ...सांवरिया ले चल परली पार... भजन प्रस्तुत कर भावविभोर कर दिया।
मुख्य यजमान गीता मिश्रा, गोरखनाथ मिश्र द्वारा कथा झांकी पोथी एवं व्यासपीठ पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान विनोद शुक्ल, बृजनंदन दास मिश्रा, रविशंकर मिश्र, संतोष मिश्र, अभिषेक मिश्र, अशोक मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, शिवप्रकाश मिश्र, जयप्रकाश मिश्र आदि मौजूद रहे। संवाद