बहादुरपुर। रोज़गार की तलाश में ओमान की फैशन डिजाइनिंग कंपनी में काम करने गए कलवारी के युवक समेत कुल 18 भारतीयों का मामला श्रम शोषण और कंपनियों की वादाखिलाफी का उदाहरण है। कलवारी थाना क्षेत्र के महुआपार कला के नंदलाल निषाद और गोरखपुर के रावतपुर निवासी अमरजीत निषाद भी शामिल हैं। ये सभी तीन से सात वर्षों से वहां फंसे हुए थे, जिनमें से 18 लोग दूतावास के संपर्क में आने के बाद गुरुद्वारे में ठहराए गए हैं।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने रेस्क्यू अभियान चलाकर 18 फंसे हुए भारतीयों को कंपनी से छुड़वाया और पासपोर्ट वापसी के लिए प्रक्रिया शुरू की है। दूतावास ने कहा है कि जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका है, उन्हें पासपोर्ट मिलते ही भारत भेज दिया जाएगा। इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से नंदलाल ने बताया कि हमें अभी दूतावास द्वारा गुरुद्वारे में रखा गया है। दूतावास के कर्मचारी कह रहे हैं कि कंपनी से पासपोर्ट मांगा गया है। मिलते ही भारत भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जून 2022 में रोजगार की उम्मीद के साथ वह और अमरजीत ओमान की एक फैशन डिजाइन कंपनी में काम करने गए थे। दो साल बाद जून 2024 में लौटने का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी ने पासपोर्ट और वीजा जब्त कर लिया, और तय वेतन भी समय से नहीं दिया।
नंदलाल ने यह भी बताया कि मुझे तीन साल हुए हैं, लेकिन कई साथी ऐसे हैं जो पांच से सात साल से फंसे हैं। 18 लोग ऐसे हैं जो अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। जबकि 14 लोग ऐसे हैं जिन्हें एक साल भी नहीं हुआ है, और दूतावास द्वारा बताया गया है कि उन्हें फिलहाल वापस काम पर भेजा जाएगा। परिवारजनों द्वारा विदेश मंत्रालय, स्थानीय प्रशासन और मीडिया के माध्यम से लगातार शिकायतें की गईं, जिसके बाद भारतीय दूतावास हरकत में आया।