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सब्जियों के बढ़े दाम ने बिगाड़ा खाने का जायका

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आलू 45 और प्याज बिक रहा 80 रुपये किलो
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पिछले कुछ समय से सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे एक ओर खाने जायका बिगड़ रहा है, दूसरी ओर किचेन का बचट। महंगाई के चलते लोग सब्जियों की खरीदारी में कटौती कर रहे हैं। सलाद में प्याज व टमाटर के बहुत से शौकीन भी अपना शौक पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे गृहणियों में भी रोष है।
शहर के दक्षिण दरवाजा की जामवंती सोनी कहती हैं कि सब्जियों के दामों में तो आग लग गई है। खरीदारी करते समय यह सोचना पड़ रहा है कि क्या खरीदा जाए और क्या न खरीदा जाए। सब्जियों में सबसे महत्वपूर्ण आलू होता है, जो कि इस समय 45 रुपये किलो मिल रहा है। सब्जियों ने तो बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
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पुरानी बस्ती की अर्चना शुक्ला कहती हैं कि किसी भी सब्जी को बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्याज की होती है, जो कि इस समय 80 रुपये किलो बिक रहा है। महंगाई के चलते खाने का जायका बिगड़ गया है। गौर के केसरई गांव की रहने वाली सुधा यादव कहती हैं कि ऐसा लगा रहा है मानों सरकार को सब्जियों के दामों पर कोई कंट्रोल ही नहीं रहा है। बेतहाशा मूल्य वृद्धि के चलते लोग परेशान है, सबसे अधिक तो प्याज रुला रहा है। इसके अलावा अन्य सब्जियों के भाव भी आसमान छू रहे हैं। शहर के बरगदवा की आशा चौधरी कहती हैं कि त्योहारी सीजन में सब्जियों के बढ़ते दाम किसी आफत से कम नहीं है, एक तो लॉकडाउन ने पहले से ही बजट बिगाड़ रखा था, अब जब गाड़ी धीरे-धीरे गाड़ी पटरी आने लगी थी, तो अब साब्जियों के बढ़ते दामों ने परेशानी में डाल दिया है।
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खुले बाजार में साब्जियों के दाम
लाल आलू : 45 रुपये किलो
सफेद आलू : 40 रुपये किलो
प्याज : 80 रुपये किलो
टमाटर : 60 रुपये किलो
भंड़ी : 60 रुपये किलो
गोभी : 100 रुपये किलो
लौकी : 30 रुपये किलो
परवल : 80 रुपये किलो
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अधिकारी की सुनिए
मंडी समिति के सचिव राजित राम वर्मा कहते हैं कि मंडी परिधि के बाहर पांच जून 2020 को भारत सरकार ने एपीएमसी एक्ट को खत्म कर दिया है, अब मंडी से बाहर हमारा कंट्रोल नहीं रह गया है। मंडी के भीतर आलू 25 सौ रुपये क्विंटल से 31 सौ रुपये क्विंटल तक बिक रहा है, प्याज को लेकर कहते हैं कि यह पांच हजार से पांच हजार 800 रुपये क्विंटल बिक रही है। शासन से निर्देश प्राप्त होने पर कार्रवाई की जाएगी।
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