बस्ती। कभी शहरियों के आकर्षण का केंद्र रहा वन विहार, अब बदहाली झेल रहा है। मगरमच्छ भी लापता हो चुके हैं। जंग खाकर टूटते झूल और तालाब में तैरती गंदगी इसकी गवाही दे रही है। जब वन विहार की नींव रखी गई थी तो शहरियों में उत्साह था। उनका कहना था कि मनोरंजन के लिए अब आसपास के जिलों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। साल बीतते गए और बदहाली की कहानी शुरू हो गई।
वन विहार की शुरुआत वर्ष 30 नवंबर 2019 को हुई थी। उद्घाटन के बाद से ही इसमें शहरियों की भीड़ उमड़ने लगी थी। यहां पर उस समय अजगर और मगरमच्छ देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। वन विहार में प्रवेश करते ही अजगर देखने को मिल जाते थे। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि अब यहां पर कोई भी जानवर नहीं हैं। इन्हें दूसरे जगहों पर भेज दिया गया है। यहां घूमने आने वाले लोगों के लिए पहले आकर्षण का केंद्र पानी में तैरते मगरमच्छ हुआ करते थे, मगर उस तालाब में अब खर-पतवार दिखाई दे रहे हैं।
शहर के रहने वाले प्रदीप ने बताया कि वन विहार में प्रवेश के लिए टिकट के लिए 10 रुपये लिए जाते हैं, मगर पर्यटकों की सुविधा के लिए कुछ भी नहीं है। शौचालय भी टूटा-फूटा है। पानी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शौचालय का इस्तेमाल करने से पर्यटक कतराते हैं। रविवार को दोपहर दो बजे तक चार सौ टिकट बिक चुके थे। वन विहार के बगल रहने वाले नेता चौहान का कहना है कि वॉच टावर की सीढि़यां जंग खाकर टूट रही हैं। इसका प्लेटफॉर्म भी जर्जर होकर टूट रहा है। वन विहार के भीतर पार्क ही लोगों को लुभा रहा है। यहां लगे झूले का आनंद लेते बच्चे देखे गए।
जहां चलती थी नाव, वहां हो रहा मछली पालन
वन विहार में नौकायान की भी सुविधा थी, मगर यह सुविधा अब उपलब्ध नहीं है। नौकायन के लिए बना तालाब अब मछली पालन के काम आ रहा है। रविवार को करीब एक बजे मछुआरे तालाब में मछली पकड़ रहे थे। वन विहार के प्रवेश द्वार पर एक हैंडपंप लगा है। यह काम तो कर रहा है, मगर यहां आने वाले लोग इसका पानी पीना नहीं चाहते हैं। भीतर लगा हैंडपंप पानी ही नहीं उगल रहा है। बताया गया कि यह हैंडपंप कई महीनों से खराब है।
कोट
वन विहार की खामियां जल्द ही दुरुस्त करा दी जाएंगी। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है।
-डॉ. शरीन, प्रभागीय निदेशक, वन प्रभाग