बस्ती। जिले के शहरी बाजार हो या फिर गांव-कस्बे हर जगह रंगीन मिठाइयों और मिलावटी चटनी से बने खाद्य पदार्थों की भरमार है। फास्टफूड मेंं धड़ल्ले से रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, चमकदार दिखने वाली बिरयानी भी सेहत के लिए बल्कि धीमा जहर है। इनके सेवन से न सिर्फ संक्रमण का शिकार हो सकते हैं, बल्कि त्वचा के साथ अन्य बीमारी भी घेर लेंगी। फुटपाथ और सड़क पटरियों पर सजी दुकानों पर युवाओं की भीड़ लगी रहती है।
बता दें कि हाल ही में अमरोहा में 16 वर्षीय बालिका की मौत की वजह मोमोज, चाऊमीन, बर्गर बने थे। यह परेशानी बच्चों में तेजी से पनप रही है। कारण, बच्चे बड़े ही चाव से ऐसे फूड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बीमारी का घर है। बावजूद इसके विभाग अभी संजीदा नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में हर तीसरे बच्चे में फास्ट फूड की वजह से पेट की बीमारी मिल रही है। आंतों में संक्रमण तक हो रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि फास्टफूड में सिंथेटिक रंग, केमिकल और मैदा की अधिक मात्रा से पेट में विकार बढ़ रहे हैं। ओपीडी में औसतन 100 मरीज आते हैं। इनमें से 10 फीसदी में पेट में दर्द, सूजन, अपच, भूख कम लगना की शिकायत मिल रही है। इनमें पांच फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो फास्ट फूड और बाजार का भोजन अधिक कर रहे हैं। जिसमें कई बच्चों की हालत ज्यादा खराब मिल रही है। पूछताछ में पता चला कि ये सप्ताह में तीन से चार दिन फास्ट फूड खाते हैं। इसमें पेट में अल्सर, आंत में संक्रमण, सूजन हो रही है। कुछ की सर्जरी भी करानी पड़ रही है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी
फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के अनुसार, फास्टफूड में स्वाद के लिए केमिकल और रंग मिलाए जाते हैं। फाइबर युक्त भोजन की कमी हो रही है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। बच्चे हरी सब्जी व अन्य पौष्टिक भोजन से बचते हैं, जिससे कुपोषित भी हो रहे हैं। साफ-सफाई में कमी से डायरिया भी होता है।
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सिंथेटिक रंग से लाल हो रही चटनी
सर्जन डॉ. तिवारी के अनुसार, फास्टफूड में स्वाद के लिए केमिकल और चटनी-सॉस में सिंथेटिक रंग मिलाए जा रहे हैं। लंबे समय तक इसके उपयोग से आंत में संक्रमण ओर पीलिया मिल रहा है। पेट में अल्सर, नसों में खिंचाव, पेट में दर्द, भूख कम लगना समेत अन्य परेशानी मिल रही है। दवाएं देने के साथ अभिभावकों को बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की सलाह भी देते हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को हरी सब्जी, फल, सलाद खाने पर जोर दें।
- हरी सब्जी से बच्चों के लिए घर पर पसंदीदा सामग्री बनाएं।
- स्कूलों में कैंटीन में फास्टफूड पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
- खाद्य विभाग फास्टफूड की गुणवत्ता के लिए सैंपलिंग लें।
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118 नमूनों में मिले थे रंगीन खाद्य सामग्री
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने नवंबर तक 163 निरीक्षण कर 90 जगहों पर छापेमारी किया था। इस दौरान 118 सैंपल संदिग्ध मिठाई, नमकीन, रिफाइंड, रोल, बर्फी, बेसन, रंगीन मिठाई, सरसों तेल आदि खाद्य शामिल थे। जिसमें अधिकांश सामग्री में रंग और सिंथेटिक रंग मिले थे। 54 रिपोर्ट फेल मिले थे। बताया गया कि नमूनों में मानक से अधिक रंग मिले पाए गए थे। जिसके बाद खाद्य सामग्री को नष्ट करा दिया गया था। विभाग इन दुकानों को नोटिस जारी किया था। इधर दिसंबर से अब तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से कलर युक्त मिठाई, खाद्य सामग्री के लिए अभियान चलाया जा रहा है। 12 नमूने एकत्र करके भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। साथ ही कलरयुक्त खाद्य सामग्री का प्रयोग न करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
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ग्रोथ रोकने के साथ लीवर और किडनी को नुकसान
एमडी डॉ. पीएल गुप्ता ने बताया कि सामान्य तौर पर गहरे पीले कलर की मिठाइयों में औरामिन मिलाया जाता है। फास्टफूड के खाद्य सामग्री में लाल कलर और हरा केमिकल कलर मिलाते हैं, यह शरीर की ग्रोथ रोकने के साथ ही लीवर व किडनी को नुकसान पहुंचाता है। मेटानिल येलो कलर का इस्तेमाल लड्डू से लेकर जलेबी, बिरयानी में किया जाता है। इसका पेट, किडनी और लीवर पर सबसे ज्यादा असर होता है। इससे पेट में इंफेक्शन के साथ ही शरीर में एलर्जी और यूरिन इंफेक्शन भी हो सकता है। मिठाइयों व कुछ खास किस्म के खाद्य पदार्थों को आकर्षक और चमकीला बनाने के लिए रोडामाइन कलर का इस्तेमाल किया जाता है। जो शरीर में रेड ब्लड सेल्स को ब्रेक करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कम करता जाता है।
कोट
अमरोहा में हुई घटना को संज्ञान में लेते हुए ठेले और खाद्य पदार्थ बिक्री और निर्माण इकाई पर जांच जारी है। संदिग्ध मिठाई और खाद्य सामग्री जैसे चटनी से लेकर रंगीन फास्टफूड की सैंपलिंग कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
-चितरंजन कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य, ग्रेड-दो, बस्ती।