बस्ती। पहले उम्रदराज लोगों में आम मानी जाने वाली यूरिक एसिड की समस्या अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 12 मरीज पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि हर दिन जिला अस्पताल आने वाले 10-12 युवाओं में यूरिक एसिड की समस्या देखने को मिल रही है। इसका प्रमुख कारण खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली है। बताया कि वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती। शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है।