फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: फर्जी डीएल की जांच करने पहुंची डिप्टी कमिश्नर की टीम

विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। अरुणाचल प्रदेश से बड़े पैमाने पर बैकलॉग एंट्री कराकर बस्ती से पता बदलवाकर हैवी डीएल बनवाने के खेल की जांच अब शासन स्तर से शुरू हो गई है।
विज्ञापन

इस मामले को लेकर शासन ने परिवहन आयुक्त से लेकर डीएम और विभाग के स्थानीय अफसरों को लाइनअप किया है। मंगलवार को शासन से नामित उप परिवहन आयुक्त राजकुमार सिंह की टीम फर्जी हैवी डीएल मामले की जांच करने बस्ती पहुंची। आरटीओ में टीम ने हैवी डीएल से संबंधित डाटा खंगालना शुरू कर दिया है। इस दौरान पूरे कार्यालय में हड़कंप की स्थिति रही।
हैवी डीएल में एड्रेस चेंज का अप्रूवल देने के लिए अधिकृत आरआई और उनके द्वारा नामित बाबू इस नाटकीय खेल में घिर गए हैं। यह दोनों जिम्मेदार फिलहाल यह तर्क देते हुए अभी बच रहे हैं कि सारथी पोर्टल पर हैवी डीएल के बैकलॉग एंट्री का डाटा प्रदर्शित नहीं होता है। यह भी नहीं पता चलता कि बैकलॉग एंटी किस जनपद या किसी प्रदेश से किया गया है।
विज्ञापन

इसके अलावा पता बदलवाने की प्रक्रिया में एनओसी की अनिवार्यता भी नहीं है। इस आधार पर सभी तरह के हैवी डीएल के पता बदलने के आवेदन को संस्तुति मिलती चली गई। अरुणाचल प्रदेश से बैकलॉग एंट्री के बाद बस्ती से पता बदलने और रिन्यूवल होने वाले हैवी डीएल की लंबी फेहरिस्त है। यह मामला उजागर होने के बाद संभागीय निरीक्षक प्राविधिक सीमा गौतम ने सिर्फ उन्हीं आठ डीएल नंबरों को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए ब्लॉक किया है, जो अमर उजाला में प्रकाशित हुए थे।
यह कार्रवाई एक दिन पहले आरटीओ प्रशासन फरीदुद्दीन के निर्देश पर हुई है। लेकिन शासन स्तर के उच्च अधिकारी इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। इसीलिए मंगलवार को उप परिवहन आयुक्त की टीम बस्ती संभागीय परिवहन कार्यालय पहुंच गई। यहां हैवी डीएल से संबंधित सभी डाटा खंगाले जा रहे हैं। खबर हैं कि बैकलॉग के आधार पर पता बदलने और रिन्यूवल कराने वाले हैवी डीएल बस्ती से अधिक संख्या में बनवाए गए हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में है।
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दलालों के सिडिंकेट के साथ स्थानीय अफसरों की भी इस खेल में संलिप्तता रही है। यहीं वजह हैं कि बैकलॉग एंट्री वाले हैवी डीएल के पता बदलवाने एवं रिन्यूवल के आवेदन तक तत्काल जिम्मेदार संस्तुति कर देते रहे। वह आवेदक से किसी तरह का पूछताछ भी करते थे। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि सीधे हैवी डीएल बनवाने वाले आवेदक दलालों के संपर्क में ही रहते थे।
विज्ञापन

उन्हें विभाग में आने की ज्यादा जरूरत भी नहीं पड़ती रही। दलालों का ही सिंडीकेट बस्ती से लेकर अरुणाचल तक सभी प्रक्रिया पूर्ण कराने में सफल हो जाता था। शासन की टीम मामले की तह तक जैसे-जैसे पहुंच रही हैं स्थानीय जिम्मेदारों की चिंता बढ़ती जा रही है। परिवहन आयुक्त ने की डीएम से बात : पूरे मामले में परिवहन आयुक्त ने डीएम कृत्तिका ज्योत्सना से भी बात की। डीएम ने जवाब में कहा कि आरआई सीमा गौतम ने उन्हें आठ डीएल नंबर ब्लॉक करने की जानकारी उपलब्ध कराई है। इसके अलावा छह महीने के डाटा की जांच की भी जानकारी दी गई है। डीएम ने परिवहन आयुक्त को जानकारी दी कि मंगलवार शाम को टेक्निकल एक्सपर्ट के साथ आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें सभी तथ्यों पर छानबीन की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें