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Basti News: यात्री हजार...हर्रैया में अब भी बस स्टेशन बनने का इंतजार

Mon, 17 Mar 2025 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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हर्रैया/गौर। वर्ष 1875 में स्थापित जिले की सबसे बड़ी तहसील हर्रैया में यात्रियों के लिए परिवहन निगम की उपेक्षा भारी पड़ रही हैं। यहां के लोगों के लिए आज भी स्थाई तौर पर बस स्टेशन की सुविधा नहीं है। बस स्टेशन न बनाए जाने से बसें जहां-तहां ढाबों पर रुकती हैं। इससे सैकड़ों की संख्या में यात्री प्रतिदिन सड़क किनारे खड़े होकर गंतव्य के लिए बसों का इंतजार करते हैं। दशकों बाद भी बस स्टेशन स्थापित न हो पाने की वजह से यहां के विकास की गति सुस्त पड़ी है।
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जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण यहां आने वाले यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। तहसील मुख्यालय, ब्लॉक, सीएचसी, महिला अस्पताल होने के साथ-साथ यहां पर तमाम सरकारी व गैर सरकारी प्रशासनिक कार्यालय व अन्य प्रतिष्ठान स्थापित हैं। महूघाट के पास बने अस्थायी पड़ाव पर शौचालय व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था भी मयस्सर नहीं है। छाजन के अभाव में यात्रियों को गर्मी में मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। यहां से लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, गाजियाबाद, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, बहराइच, गोंडा, अयोध्या जाने के लिए हजारों की संख्या में यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन होता है। रोडवेज की बसें हाईवे सड़क के किनारे खड़ी होती हैं तो वहीं यात्री भी बारहों महीने फुटपाथ पर खड़े होकर मौसम की मार झेलते हैं। चेक पोस्ट के नाम पर हर्रैया मनोरमा नदी पुल के दक्षिण तरफ निर्मित एक छोटे से कक्ष में बैठकर विभागीय कर्मी रुकने वाली बसों के यात्री संख्या तथा लगेज आदि का निरीक्षण करते थे और लोगों को यह पता रहता था कि बस का ठहराव होगा। करीब आठ वर्ष पहले परिवहन विभाग का यह चेक पोस्ट भी बंद हो गया है।
जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा का नतीजा है कि आज तक यहां पर बस स्टेशन की स्थापना नहीं हो सकी। यदि बस स्टेशन बन जाए तो यात्रियों को सुविधा मिलने लगे। हर्रैया तहसील प्रदेश की सबसे बड़ी तहसील है। जहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रियों का छोटे बड़े शहरों में आना-जाना होता है। बावजूद उसके अभी तक बस अड्डा नहीं बन पाया।
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- नमन कुमार सिंह, मुरादीपुर
हर्रैया में बस अड्डा न बनने से यात्रियों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है, लेकिन कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। स्थायी बस अड्डा न होने की वजह से बसें जहां-तहां रुक जाती हैं, यात्रियों को धूप में इधर-उधर चक्कर लगाना पड़ता है। हर्रैया में सरकारी रोडवेज बस अड्डा न होने से यात्रियों को डग्गामार प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे संचालक मनमाना किराया वसूलते हैं।
- सुभाष चंद्र त्रिपाठी, हर्रैया कस्बा



इन स्थानों से सुबह में ही मिलती है रोडवेज के बसें

जिले के गौर बाजार, बभनान, टिनिच, हलुआ बाजार, परशुरामपुर, दुबौलिया बाजार, लालगंज, गायघाट से सुबह में ही रोडवेज की बसें यात्रियों को मिलती है। उसके बाद पूरे दिन परिवहन निगम की बसें नहीं मिलतीं। शाम को वापसी में यात्रियों को वही बस दोबारा अपने गंतव्य तक जाने को मिलेगी।



जमीन के लिए किया जाएगा प्रयास : एसडीएम

आबादी के हिसाब से हर्रैया में बस अड्डा होना बेहद जरूरी है। इसके लिए जमीन की तलाश की जाएगी। मैं बहुत जल्द आया हूं, इसलिए इसके बारे में बहुत कुछ नहीं बता सकता।
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- मनोज प्रकाश, एसडीएम हर्रैया
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