बस्ती। जिले के परशुरामपुर थाने से ड्यूटी के दौरान लापता दरोगा अजय गौड़ के मामला पुलिस के कयास के बिल्कुल उलट निकला। चार दिन बाद उनका शव अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के तिघुरा माझा गांव के निकट सरयू नदी में उतराया हुआ मिला। आनन-फानन बस्ती पुलिस की टीम अयोध्या भेजी गई। अयोध्या में शव बरामद से दरोगा के लापता होने की कहानी अब और उलझ गई है।
लापता दरोगा को ट्रेस करने के लिए एसपी यशवीर सिंह ने पांच टीमें लगाई गई थीं। पुलिस अलग-अलग मोहरे पर काम कर रही थी। पांच फरवरी को शाम चार बजे वह थाने से अचानक बाइक से निकल गए थे। अगले दिन उनकी बाइक कुआनो नदी के अमहट घाट पर लावारिश हालत में मिली थी। पुलिस को उनका अंतिम लोकेशन भी यहीं पर मिला था। संदेह के आधार पर दो दिनों तक कुआनो में सर्च अभियान चलाया गया।
रविवार को परशुरापुर थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय एसडीआरएफ टीम के साथ अमहट घाट से लेकर भद्रेश्वरनाथ तक दो किमी की दूरी में पूरे दिन मोटर बोट से सर्च अभियान में जुटे रहे। यहां पुलिस उच्चाधिकारियों की भी आवाजाही लगी रही। आठ राउंड सर्च अभियान चलाने के बाद तीन बजे अचानक बंद कर दिया गया। इसके बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम लौट गई। दरोगा अजय गौड़ मूल रूप से देवरिया जिले कोतवाली थाना क्षेत्र के मूड़ाडीहा गांव के रहने वाले थे। दरोगा की पत्नी रंजीता, छोटे भाई एडीएम झांसी अरुण कुमार गौड़ समेत परिवार के कई सदस्य अमहट घाट पर मौजूद रहे।
थाने का सक्रिय कराया गया सीयूजी नंबर : पांच फरवरी को दरोगा अजय गौड़ एसएचओ का प्रभार भी संभाले हुए थे। उस दिन थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय अवकाश पर गए हुए थे। इसलिए सीयूजी नंबर दरोगा अजय के पास था। अभी तक के जांच में पता चला है कि वह शाम चार बजे थाने से अकेले अपनी बाइक से निकले थे। थाने की चार पहिया गाड़ी और किसी हमराही को साथ नहीं लिए। थानाध्यक्ष का प्रभार रहते हुए ड्यूटी से वह रातभर गायब रहे। लेकिन, थाना कार्यालय के अन्य स्टॉफ या जिम्मेदार अफसर उनका लोकेशन नहीं पता किए।
अगले दिन पत्नी रंजीता के सक्रिय होने के बाद महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी। इसके बाद दरोगा की छानबीन शुरू हो गई। उनके पास पर्सनल और थाने का सीयूजी दोनों नंबर बंद पाया गया। रविवार को थाने का सीयूजी नंबर दोबारा सक्रिय कराया गया। थानाध्यक्ष विश्वमोहन राय इस नंबर का उपयोग भी कर रहे हैं। शनिवार तक यह नंबर बंद जा रहा था। उनके सर्विस रिवाल्वर और मोबाइल के बरामदगी के बारे में महकमे के अधिकारी अभी कुछ बता नहीं रहे हैं
परिजन भी पहुंच गए : दरोगा अजय गौड़ मूल रूप से देवरिया जिले के कोतवाली क्षेत्र के मूड़ाडीहा गांव के रहने वाले हैं। अजय की पत्नी और बेटा उत्कर्ष (15) बस्ती में गदहाखोर गांव के निकट किराये के घर में रहते हैं। बड़ा बेटा अमृत राज कानपुर में रहकर पढ़ाई करता है। पत्नी के अनुसार अजय परशुरामपुर से हफ्ते में एक या दो बार कमरे पर आते रहे। घर में किसी तरह का विवाद नहीं था।
वहीं उनके लापता होने की खबर सुनने के बाद शनिवार की रात उनके छोटे भाई अरुण कुमार गौड़ भी पत्नी के साथ पहुंच गए हैं। वह झांसी में एडीएम के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि अजय मझले भाई हैं। सबसे बड़े भाई स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं।
ये हैं अहम सवाल : दरोगा अजय के लापता होने के मामले में कुछ अहम सवाल है जिसका उत्तर फिलहाल अभी पुलिस के पास भी नहीं है। प्रभारी थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी होने के बाद भी वह आखिर बाइक से अकेले क्यों निकले। बिना किसी उच्चाधिकारी की अनुमति के स्टेशन छोड़कर 50 किमी दूर जिला मुख्यालय पर उनकी लोकेशन क्यों पाई गई।
परिजनों का सवाल है कि थानाध्यक्ष का प्रभार होने के बाद भी उनका लोकेशन रातभर क्यों नहीं ट्रेस किया गया। सबसे अहम सवाल यह कि सीसीटीवी फुटेज में अमहट घाट की तरफ बाइक लेकर जाते हुए व्यक्ति कौन हैं। यह सभी प्रश्न अभी अनसुलझे हुए हैं, पुलिस इस पर काम करना शुरू कर दी है।