दुबौलिया। क्षेत्र के कौवाडाड़ में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन अयोध्या धाम से आए आचार्य दीपक शुक्ला ने महापुराण का महात्म्य बताया। उन्होंने गणेश महिमा और कथा श्रवण से होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि कलियुग में मनुष्य अपने भाव को सत्संग के जरिए ही स्थिर रख सकता है। सत्संग के बिना विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता और बिना सौभाग्य के सत्संग सुलभ नहीं हो सकता है। श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन ओर स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। कथा सुनने से प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। संवाद