मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट, डायलसिस है, टेक्नीशियन नहीं
बस्ती। जनपद के मेडिकल कॉलेज में संसाधन तो भरपूर हैं मगर यहां तकनीशियन के पद रिक्त हैं। फलस्वरूप कॉलेज से संबद्ध डायलसिस यूनिट, ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट व वेंटीलेटर मशीनों का संचालन ठप है। इन स्थितियों में कॉलेज प्रशासन जैसे-तैसे जरूरत पर ही इन्हें संचालित करता है। अन्य दिनों में यह पूरी तरह बंद रहता है। इसे लेकर मेडिकल कॉलेज का तंत्र परेशान है। वहीं, तकनीशियनों की कमी को दूर करने में कॉलेज प्रशासन नाकाम है।
जिले में कोरोना कॉल की दूसरी लहर में मेडिकल कॉलेज ने अहम भूमिका निभाई थी। यहां पूरा तंत्र लगकर व्यवस्था संचालित कर रहा था। तब यहां आउट सोर्सिंग से डायलेसिस, वेंटीलेटर यूनिट के लिए तकनीशियन की नियुक्ति कर उन्हें प्रयोग किया गया, मगर समय के साथ आउट सोर्सिंग कर्मियों का अनुबंध समाप्त हो गया और वे लौटा दिए गए। तब से लेकर अब तक वेंटीलेटर के लिए करीब 36, डायलेसिस यूनिट के लिए छह, आक्सीजन जनरेटर प्लांट के लिए तीन तकनीशियन की जरुरत अब तक पूरी नहीं हो पाई है। नतीजतन डायलेसिस यूनिट जरूरत पर ही संचालित होता है, जबकि कोविड मरीजों की डायलेसिस तो पूरी तरह बंद है। इसी प्रकार वेंटीलेटर संचालन के लिए तकनीशियन तो नहीं है, मगर कॉलेज प्रशासन इसे जैसे-तैसे संचालित कर रहा है। इन स्थितियों से निपटने का कोई कारगर उपाय कॉलेज के जिम्मेदारों को नहीं सूझ रहा है।
प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने तकनीशियन की कमी की पुष्टि करते हुए कहा कि टेक्निकल स्टाफ की कमी के चलते मशीनों का भरपूर उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में कई बार दिक्कत भी आ जाती है। कहा कि डायलेसिस यूनिट हो या वेंटीलेटर अथवा ऑक्सीजन जेनरेटर प्लांट सभी को आवश्यकता पड़ने पर संचालित कर काम चलाया जा रहा है, मगर तकनीशियन की जरूरत है। ऐसे में डिमांड पत्र भेजा गया है। जल्द से जल्द व्यवस्था हो जाए तो कॉलेज से संबद्ध अस्पताल को फिर से उसी गति में संचालित किया जा सकेगा।