बस्ती में चार पर सपा और एक पर भाजपा को मिली जीत
बस्ती। जिले की पांचों विधानसभा सीटों में से चार पर सपा और एक पर भाजपा को जीत मिली है। 2022 के चुनाव में भाजपा अपने ही 2017 के रिकार्ड को बरकरार नहीं रख पाई। पिछले चुनाव में भाजपा को जहां जिले की सभी पांचों सीटों पर जीत मिली थी, वहीं इस बार समाजवादी पार्टी ने भाजपा से बस्ती सदर, कप्तानगंज, रुधौली और महादेवा विधानसभा सीट छीन ली। रुधौली और कप्तानगंज में तो सपा के उम्मीदवार शुरुआती राउंड से सबसे ऊपर रहे, एक-दो चरण में भाजपा टक्कर में दिखी, लेकिन इन दोनों सीटों पर सपा के वोटों का कारवां जीत पर ही आकर रुका। वहीं, महादेवा और बस्ती सदर में आखिरी के दो-तीन राउंड में बाजी पलट गई। महादेवा में सपा-सुभासपा गठबंधन और सदर में सपा के प्रत्याशी को जीत मिली। भाजपा के खाते में केवल हर्रैया की ही सीट आई है।
विधानसभा चुनाव 2022 में बस्ती में समाजवादी पार्टी की साइकिल तेज रफ्तार से दौड़ी। बस्ती सदर से सपा के महेंद्र नाथ यादव, कप्तानगंज से सपा के कविंद्र चौधरी अतुल, रुधौली से सपा उम्मीदवार राजेंद्र चौधरी और महादेवा सुरक्षित सीट से सपा-सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशी दूधराम को जीत मिली है। वहीं, हर्रैया विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार अजय सिंह दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। केवल हर्रैया की सीट की भाजपा के खाते में आई। वहीं, वर्ष 2017 के नतीजों पर गौर करें तो बस्ती सदर से भाजपा के दयाराम चौधरी, कप्तानगंज से सीए चंद्र प्रकाश शुक्ला, रुधौली से संजय प्रताप जायसवाल, हर्रैया से अजय सिंह और महादेवा सुरक्षित सीट से भाजपा के रवि सोनकर ने जीत दर्ज की थी। 2022 में भाजपा ने रुधौली में प्रत्याशी बदल कर 2017 में विधायक चुने गए संजय जायसवाल की पत्नी संगीता जायसवाल को टिकट दिया, जबकि अन्य सीटों पर भाजपा ने 2017 में चुनाव जीतकर आए चेहरों पर ही भरोसा किया था। लेकिन, रुधौली में भाजपा उम्मीदवार का चेहरा बदलने का लाभ समाजवादी पार्टी को मिला। यहां समाजवादी पार्टी के राजेंद्र चौधरी ने जीत दर्ज भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया। वहीं, कप्तानगंज सीट से पांच बार विधायक रहे राम प्रसाद चौधरी ने अपने बेटे कविंद्र चौधरी को मैदान में उतारा था। यहां शुरूआती चरणों में भाजपा के चंद्र प्रकाश शुक्ल मुकाबले में रहे, लेकिन दूसरे राउंड से कवींद्र चौधरी ने बढ़त ली तो उनका भी कारवां जीत के साथ ही रुका। वहीं, आखिरी के दो-तीन राउंड में महादेवा सुरक्षित सीट की गणित बदल गई। यहां शुरू से आगे चल रहे भाजपा के रवि सोनकर चुनाव हार गए। यही हाल बस्ती सदर सीट का रहा। भाजपा के दयाराम चौधरी शुरू से ही आगे चल रहे थे लेकिन आखिरी दो-तीन राउंड में सपा के महेंद्र नाथ यादव ने बढ़त ली और करीब दो हजार मतों के अंतर से चुनाव जीत गए।
भाजपा को एक सीट से ही करना पड़ा संतोष
भाजपा को केवल हर्रैया सीट से ही संतोष करना पड़ा। एकमात्र हर्रैया से भाजपा के अजय सिंह दोबारा चुनाव जीत कर अपने विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का कमल खिलाने में कामयाब रहे। हर्रैया में सारे सियासी समीकरण को ध्वस्त करते हुए अजय सिंह चुनाव जीते।
अपनी विरासत सौंपने में कामयाब रहे रामप्रसाद
भाजपा, सपा और बसपा के टिकट पर कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र को अपनी सियासी कर्मभूमि बनाने वाले राम प्रसाद चौधरी ने विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत का अहसास करा दिया। इस बार उन्होंने सपा के टिकट पर अपने बेटे कविंद्र चौधरी को मैदान में उतारा था। शुरूआत में लोगों को मानना था कि राम प्रसाद खुद चुनाव लड़ते तो बात और होती, लेकिन नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया कि वह अपनी राजनीतिक विरासत बेटे को सौंपने में कामयाब रहे। कवींद्र चौधरी ने कप्तानगंज सीट से भाजपा के सीए चंद्र प्रकाश शुक्ल को करारी शिकस्त देकर विधानसभा का रुख किया है।