संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजस्व मामलों का निपटारा आसान नहीं है। भूमि पैमाइश, वरासत, पत्थर नसब, अमल दरामद जैसे प्रकरण को लेकर किसी भी फोरम में जाइए, घूम फिर कर मामला तहसील में ही आएगा।
यहां निचली कड़ी से लेकर नायब एवं तहसीलदार स्तर के कार्यालय तक मुंशियों का संजाल है। अलग-अलग प्रकृति के मामले में फरियादियों को इन्हीं मुंशियों से सेटिंग करनी पड़ रही है। बिना पैकेज के प्रकरण का समाधान नहीं है।
कभी-कभी पैकेज के बाद भी मामला उलझने पर सबकुछ सार्वजनिक हो जाता है। तहसीलों में भूमि पैमाइश, वरासत, खारिज दाखिल, आय-जाति-निवास, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी में संशोधन जैसे काम कराना आसान नहीं है।
यदि आप सोच रहे हैं कि इन कार्यों के लिए साक्ष्य के साथ प्रार्थनापत्र देने भर से फुर्सत है तो गलत होगा। प्रार्थनापत्र देने के बाद आपको मुंशी या विभाग की निचली कड़ी से सेटिंग बनानी होगी। इसके बगैर यदि सीधे प्रयास करेंगे तो सिर्फ आप नियम-कानून का ब्योरा सुनते-सुनते निराश हो जाएंगे।
इसके बाद फरियादी खुद अपना प्रकरण निपटाने के लिए शार्टकट का रास्ता खोजने लगता है। फरियादी राम प्रसाद ने बताया कि 10 साल से तहसील में आना-जाना लगा है। यहां सही काम के लिए भी पैकेज देना पड़ता है। वैध और अवैध दोनों तरह के कामों के लिए अलग-अलग पैकेज हैं। प्रत्येक कार्यालय में अहम भूमिका में दिखने वाले प्राइवेट मुंशी ही काम कराने का ठेका लेते हैं। इनसे सेटिंग हो गई तो काफी हद तक काम बन जाएगा।
जिम्मेदार भी इन्हीं के इशारे पर कलम चलाते हैं। कभी-कभी पैकेज देने के बाद भी काम उलझ जाता है। वह ऐसे कि विपक्षी तहसील से ऊपर स्तर के अधिकारियों से गुहार लगाने लगते हैं। इसके बाद निचली कड़ी की सेटिंग बेकार हो जाती है। ऐसे ही मामलों में सेटिंग करने वाला पक्ष पैकेज आदि का खुलासा एंटी करप्शन टीम या अन्य उच्चाधिकारियों से करके सबकुछ उजागर कर देता है। इसके बाद विभाग की किरकिरी होती है।
धारा- 80 कराने के लिए अलग पैकेज ः अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति की जमीन के खरीद-फरोख्त पर शासन स्तर से रोक हैं। ऐसी जमीनों की बिक्री के लिए धारा- 80 के तहत राजस्व अभिलेख में आबादी घोषित करानी पड़ती है। इसके लिए फरियादी को किसी मुंशी या निचली कड़ी के जिम्मेदार से सेटिंग बनानी पड़ती है।
इसके बाद प्रति बिस्वा 20 से 25 हजार के हिसाब से पैकेज देना पड़ता है। फिर 10 से 15 दिन के अंदर जमीन आबादी में दर्ज हो जाती है।