बस्ती। गर्भवतियों और बच्चों की मृत्युदर घटाने के लिए सभी स्टाफ नर्सों सहित फीमेल हेल्थ वर्करों को स्किल बर्थ अटेंडेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पीएचसी में तैनात चिकित्सक को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। शुक्रवार को सिकंदरपुर, सुकरौली और रुधौली पीएचसी के चिकित्सकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र दिया गया।
जिला महिला अस्पताल में स्किल बर्थ अटेंडेंट (एसबीए) प्रशिक्षण के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तैय्यब अंसारी ने कहा कि नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का मुख्य उद्देश्य बच्चों की मृत्यु दर को कम करना है। यह तभी संभव हो सकता है जब हर महिला गर्नावस्था व प्रसव के दौरान स्किल बर्थ अटेंडेंट की सेवाएं ले। उन्होंने बताया कि अतिकुपोषित गर्भवती की पहचान उसकी हालत देखकर भी आसनी से की जा सकती है। आंख, हाथ-पैर के नाखून में पीलापन, त्वचा व जीभ के रंग से भी कमजोरी का पता लगाया जा सकता है।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि यहां अधिकतर महिलाएं एनीमिया का शिकार होती हैं। ऐसी महिलाओं की पहचान आसानी से किया जा सकता है। चिकित्सकों को चाहिए कि वे गर्भावस्था पूर्व देखभाल के दौरान ही प्रत्येक गर्भवती को पंचरंगी आहार लेने के लिए प्रेरित करें। लाल रंग आहार में टमाटर, चुकंदर, पीले में संतरा, पपीता, सफेद में दूध व अंडा, हरे में मटर समेत हरी सब्जियां, काले में जामुन व खजूर का सेवन किया जाए तो कोई भी गर्भवती कुपोषण का शिकार नहीं होगी।
जिला महिला अस्पताल में 21 दिवसीय प्रसव संबंधी ट्रेनिंग में शामिल पीएचसी सिकंदरपुर की डॉ. वंदना, पीएचसी सुकरौली की डॉ. अमिता और रुधौली की डॉ. भावना को ट्रेनिंग पूरा होने पर प्रमाण पत्र दिया गया। इस दौरान डॉ. ममता रानी, राज कुमार, राकेश पांडेय, दुर्गेश मल्ल आदि मौजूद रहे।