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Basti News: हड़ताल से बिगड़े हालात...पांच-छह घंटे इंतजार के बाद भी नहीं मिल रहा इलाज

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मरवटिया में एमओआईसी को ज्ञापन देती आशा कार्यकर्ता स्रोत संगठन - फोटो : samvad
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बस्ती। स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मियों की हड़ताल से जिले की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज, महिला अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कहीं जांच के लिए नंबर नहीं मिल रहा तो कहीं डॉक्टर के अभाव में मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। एक से दो घंटे में मिलने वाली उपचार की सुविधा के लिए अब पांच से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों को जांच रिपोर्ट और दवा के लिए अगले दिन आना पड़ रहा है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मी नियमितीकरण, मानदेय वृद्धि और कैशलेस इलाज समेत विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। संगठन के अनुसार, जिले के 1500 चिकित्सकों और कर्मचारियों में से 1100 से अधिक हड़ताल पर हैं। इनमें संविदा चिकित्सक, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अब 25 बांड चिकित्सकों के भी हड़ताल में शामिल होने से संकट और गहरा गया है।
जिला अस्पताल में नियमित कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। व्यवस्था संभालने के लिए कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक ड्यूटी ली जा रही है। एक स्टाफ नर्स के जिम्मे चार से पांच वार्ड तक हैं। सीमित कर्मचारियों के सहारे मरीजों को संभालने में मुश्किल हो रही है। अस्पताल के हृदय रोग विभाग का टेलीमेडिसिन कक्ष बंद है, जबकि संक्रमण रोग विभाग में ताला लगा है। मानसिक रोग और आयुष विभाग की सेवाएं भी प्रभावित हैं।
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बुधवार को जिला अस्पताल में महज 887 पर्चे बने। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय की ओपीडी में भी कई विभागों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिले। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। महिला अस्पताल में आउटसोर्स, नियमित और कुछ संविदा कर्मचारियों की मदद से व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को यहां भी जांच और परामर्श के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन सेवा ठप होने से जेएसवाई भुगतान से लेकर जन्म प्रमाण पत्र तक पर असर है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीज परेशान
हड़ताल का असर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा है। 256 जन आरोग्य मंदिरों पर ताला लगा है। 120 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर एएनएम नहीं हैं। ब्लड जांच, स्क्रीनिंग, टीकाकरण और दवा वितरण प्रभावित हो रहा है। सीएचसी और पीएचसी पर भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सामान्य बीमारियों के उपचार से लेकर जांच और भर्ती कराने तक में दिक्कतें आ रही हैं।
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मुंडेरवा क्षेत्र में फार्मासिस्ट संभाल रहे जिम्मेदारी
मुंडेरवा। संविदा चिकित्सकों और एएनएम की हड़ताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ओड़वारा पर मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यहां तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. नीलम चौधरी और बांड चिकित्सक डॉ. यशी श्रीवास्तव के उपलब्ध नहीं रहने से पिछले दो दिनों से फार्मासिस्ट जगदंबा चौधरी मरीजों को देख रहे हैं। संविदा स्टाफ के हड़ताल पर रहने से मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं, एकमा में संविदा चिकित्सक डॉ. सुनील कुमार सौरभ के हड़ताल पर रहने के बावजूद डॉ. आनंद यादव मरीजों को देख रहे हैं।
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बोले मरीज
प्रसव पीड़ा होने पर पहले अमरौली शुमाली गईं लेकिन वहां उपचार की सुविधा नहीं मिली। इसके बाद महिला अस्पताल पहुंचीं। किसी तरह पर्चा बनवाया। दो घंटे बाद डॉक्टर को दिखाने का नंबर आया तो अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा गया। अल्ट्रासाउंड कक्ष में पहुंचने पर फिर नंबर दे दिया गया। इससे काफी परेशानी हुई। -दुर्गावती, अमरौली शुमाली
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हड़ताल से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों का ही उपचार हो पा रहा है। मरीजों को भर्ती कराने में भी टालमटोल की जा रही है। सीएचसी से जिला मुख्यालय आने के बाद भी आसानी से जांच नहीं हो पा रही है। अल्ट्रासाउंड और ब्लड जांच की सेवाएं भी प्रभावित हैं। -सुरेश प्रताप सिंह, कलवारी
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कोट::: हड़ताल का असर कम करने के लिए अलग-अलग ड्यूटी लगाकर व्यवस्था चलाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ डॉक्टरों के अनुपस्थित रहने से सेवाएं प्रभावित हुई हैं। टीकाकरण के लिए अलग तिथि निर्धारित है, जबकि ऑनलाइन कार्य भी प्रभावित हुआ है। -डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।

मरवटिया में एमओआईसी को ज्ञापन देती आशा कार्यकर्ता स्रोत संगठन- फोटो : samvad

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