दवा न मिलने से लौट रहे हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में तीन जनऔषधि केंद्र हैं, मगर यहां दवाओं का टोटा है। जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिलती हैं। सामान्य दवाओं के लिए भी भटकना पड़ता है। केंद्रों पर तीन माह से जरूरी दवाएं नहीं थीं। दो दिन पहले कुछ दवाएं मिली हैं, मगर अस्थमा व बच्चों की बीमारियों की दवा नहीं है।
शहर के तीनों सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं। हालांंकि, डॉक्टर यहां की दवाएं कम लिखते हैं, मगर जो दवाएं लिखी भी जाती हैं उनका मिलना तय नहीं होता। दो दिन पहले तक यही हाल था, मगर बुधवार को कुछ दवाएं केंद्रों को मिल गईं। संचालकों को उम्मीद है कि जल्द ही बच्चों की बीमारियों में प्रयोग होने वाली व अस्थमा की दवा मिल जाएगी।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर दवाएं है या नहीं, इसका पता नहीं चल पाता है। एक बार मरीज दिखाने आए और उसके बाद फिर दवा बदलवाने आए यह संभव नहीं है। ऐसे में जो दवाएं अस्पताल में हैं, उसे ही लिखा जाता है। यदि कोई ऐसी दवा जो यहां है नहीं और मरीज को देना जरूरी है तो उसे बाहर से लेने की सलाह दी जाती है। जन औषधि केंद्रों को और समृद्धिशाली बनानेककी जरूरत है।
जनऔषधि केंद्र के संचालकों ने कहा कि दवा के लिए बहुत दिक्कत उठानी पड़ती है। आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में लंबा समय बीत जाता है। कई बार इंडेंट भेजने के बाद सिफारिश करनी पड़ती है, तब यह दवाएं मिलती हैं। इससे मरीज यहां की दवा सस्ती होने के बाद भी डॉक्टर से लिखने को मना कर देते हैं।