पार्किंग के अभाव में सड़क के किनारे पटरियों पर खड़ा कर दे रहे वाहन
माह-ए-रमजान की वजह से बाजारों में बढ़ रही भीड़, अतिक्रमण बनी समस्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के प्रमुख मार्गों और बाजार में आजकल चलने लायक नहीं है। जहां देखों वहीं अतिक्रमण है। सड़क की पटरियों पर दुकान सज रही हैं। इसके बाद गाड़ियां खड़ी कर दी जा रही हैं। राह चलने के लिए आधी सड़क भी नहीं बच रही है। माह-ए-रमजान की वजह से भीड़भी ज्यादा हो रही है। ऐसे में जाम की समस्या से जूझना शहरवासियों की नियति बन गई है।
अतिक्रमण के चलते सड़कों पर चलने में सबसे ज्यादा दिक्कत लोगों को उठानी पड़ रही है। जाम और भीड़ की वजह से लोग खरीदारी भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। पटरी तक दुकान है और सड़क पर खड़े होकर खरीदारी करनी पड़ रही है। ऐसे में किसके साथ हादसा हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। हाल ही में मंडलायुक्त अखिलेश सिंह ने भी इस समस्या का संज्ञान लिया। उन्होंने जिला प्रशासन को शहर से अतिक्रमण हटवाने की हिदायत दी है, मगर इसका कोई असर देखने को नहीं मिल पा रहा है।
शहर के गांधीनगर, मंगलबाजार, पांडेय बाजार, करूआ बाबा आदि स्थानों पर दुकानों के आगे 10 से 20 फीट तक अतिक्रमण देखा जा रहा है। ठेलों और गुमटी की भरमार से सड़क के दोनों तरफ की पटरियां गुम हैं। दुकानों के सामने सड़क तक सामानों का प्रदर्शन किया जा रहा है। गांधीनगर और सुर्तीहट्टा में रमजान की वजह से सेवई, कपड़ा, फल-सब्जी की दुकानें सड़क तक सज रही हैं।
बाजार में आने वाले ग्राहक अपने वाहनों को सड़क पर ही खाली जगह देखकर पार्किंग कर रहे हैं। इससे पैदल चलने की जगह नहीं बच रही है। रविवार को गांधीनगर में बच्चों के साथ दुकान पर कपड़ों की खरीदारी के लिए पहुंची एक महिला को अतिक्रमण और तितर-बितर खड़े वाहनों के कारण दुकान पर पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
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सड़क तक सज रही चाय और बिरयानी की दुकान
दक्षिण दरवाजा और रेलवे स्टेशन मार्ग पर अतिक्रमण का बोलबाला है। दक्षिण दरवाजा पुलिस चौकी के सामने सड़क तक चाय की दुकान सजती है। इससे आगे बढ़ने पर नवीन मंडी के सामने तक बिरयानी और चाय आदि की दुकानों का सड़क तक अतिक्रमण है। यहां के रहने वाले पिंटू ने बताया कि अतिक्रमण के लिए नगर पालिका और यातायात पुलिस जिम्मेदार है। दुकानदारों से की इनका गठजोड़ है।
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कोट
समय-समय पर अतिक्रमण अभियान चलाया जाता है। सड़क के किनारे जहां भी इधर-उधर वाहन खड़े मिलते हैं, उसे हटवा दिया जाता है। इसके लिए आमजन का जागरूक होना भी जरूरी है।
- अजय कुमार सिंह, यातायात निरीक्षक