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बच्चों को ढोने के लिए सड़क पर दौड़ रहीं दो सौ अनफिट वाहन

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बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील नहीं हैं विद्यालय
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बस्ती। नन्हें-मुन्ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक भले ही संवेदनशील हों, मगर विद्यालय इसे लेकर संवेदनहीनता का परिचय दे रहे हैं। अपने जिले में दो सौ ऐसे वाहन हैं जो मानक का पालन नहीं कर रहे हैं। लिहाजा असुरक्षित हाल में फिटनेश पंजीकरण के बगैर जिले के विभिन्न विद्यालयों तक बच्चे पहुंच रहे हैं। फिटनेश पंजीकरण के बगैर चलनेवाले 200 स्कूली वाहनों के खिलाफ आरटीओ प्रवर्तन नोटिस भेज चुके हैं और सख्ती से सड़क पर चलने से रोकने के भी निर्देश विभाग की ओर से दिया जा चुका है।
गौरतलब है कि जिले में करीब एक हजार निजी विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन विद्यालयों में बच्चों को घर से स्कूल तक पहुंचाने के लिए स्कूली बस, मैजिक व अन्य संसाधन संचालित होते हैं। बुधवार को हरदिया के पास स्कूल वैन और कार की टक्कर में दो विद्यार्थियों के घायल होने के एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। यह स्थिति तब है जब शासन ने ऐसे वाहन जो बच्चों को स्कूल तक पहुंचाते हैं, को पूरी तरह सुरक्षित कर देने के निर्देश दे रखा है। इसके लिए आरटीओ को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। मगर हालात यह है कि जांच को लेकर आरटीओ प्रशासन भी कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। तभी तो दो सौ वाहनों को नोटिस थमा कर पंद्रह दिन का समय दे दिया। अब स्कूल तो बंद होने वाले हैं। ऐसे में स्कूली वाहनों पर कार्रवाई फिर से कागजी बन कर रह जाएगी।
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60 स्कूली बसों का चालान, पंद्रह दिन में फिटनेश कराने का निर्देश
आरटीओ प्रवर्तन रविकांत शुक्ल ने कहा कि दो सौ स्कूली वाहनों का फिटनेश पंजीकरण नहीं हुआ है, जिन्हें नोटिस भेजा गया है। इन्हें समय देकर पंद्रह दिन में फिटनेश कराने का निर्देश दिया गया है। यदि समय सीमा के भीतर फिटनेश नहीं हुआ तो इनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता पर है। अब तक जांच में साठ स्कूली बसों का चालान किया जा चुका है, जबकि आधा दर्जन पर जुर्माना लगाया गया है। मानक का पालन न करने वाले वाहनों को सख्ती से सड़क पर चलने से रोका जाएगा।
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