स्कूल खुलने और छुट्टी के समय शहर में लग रहा भीषण जाम, राह चलना मुश्किल
- बीडीए के पास अस्पताल, विद्यालय के नियोजन की कोई व्यवस्था नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ताबड़तोड़ विकास कार्यों से गुरु वशिष्ठ की नगरी भी परिवर्तित हो रहा है। मगर, शहर में जाम की समस्या बरकरार है। इसकी मुख्य वजह सड़क पर अतिक्रमण तो है ही, साथ ही, व्यस्त इलाकों में स्थित अस्पताल और स्कूल भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। गांवों से बच्चों को भरकर लाने वाली करीब 150 से दो बसें जब एक साथ गांधीनगर जैसे बाजार में घुसती हैं तो हर तरफ जाम ही जाम दिखाई देता है। सुबह और फिर दोपहर में लोगों के घंटों जाम में बर्बाद हो रहे हैं।
इन हालात में अगर अस्पतालों के साथ ही पांचवीं से ऊपर के स्कूलों को भी शहर के बाहर स्थानांतरित कर दिया जाए तो जाम की समस्या पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है। इसके लिए बस सोच बदलने और जनभागीदारी की जरूरत है। मगर, विडंबना यह है कि यहां बीडीए के पास नई टाउनशिप जैसी कोई योजना नहीं है। जिससे कारोबार, विद्यालय, अस्पताल सब सुव्यवस्थित हो सकें। यही वजह है कि अनियोजित विकास चौतरफा हो रहा है। जहां जगह खाली है, वहीं अस्पताल और विद्यालय भवन बनते जा रहे हैं। इससे भीड़ और जाम पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है।
शहर के प्रमुख अफसर भी यह मानते हैं कि इस तरह की पहल करने में कोई खास समस्या नहीं है। अगर ऐसा हो जाएगा तो बस्ती को एक नया आयाम मिल जाएगा। शहर की प्लानिंग करने वाले एक्सपर्ट की भी सलाह है कि अगर कक्षा पांच से ऊपर के बच्चों के लिए शहरी सीमा से बाहर स्कूल खुल जाएं तो बहुत हद तक जाम से राहत मिल जाएगी।
एएसपर ओम प्रकाश सिंह का कहना है शहर में वाहनों की संख्या अधिक होने से जाम की समस्या सामने आ जाती है। बच्चों की छुट्टियों के समय परेशानी न होने पाए, इसके लिए अतिरिक्त यातायात पुलिस वालों की ड्यूटी लगाई जाती है। अगर, शहर के बाहर कक्षा पांचवीं से ऊपर के छात्रों का स्कूल और अस्पताल खुल जाएं तो शहर में जाम से राहत मिलेगी और उन लोगों को भी सहूलियत हो जाएगी, जिनके मरीज की तबीयत खराब होने पर जाम में फंस के परेशान होना पड़ता है।
एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने कहा कि स्कूल की छुट्टी के समय जाम न लगे इसका ध्यान दिया जाता है, लेकिन गाड़ियों की संख्या अधिक होने की वजह से परेशानी हो जाती है।
टाउन प्लानर अभिषेक कुमार का कहना है कि शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए ठोस विकल्प तलाशने होंगे। प्रमुख स्कूल शहर के बीच गांधी और पुरानी बस्ती क्षेत्र में हैं। जब छुट्टियां होती हैं तो स्कूल के बच्चे तो जाम में फंसते ही हैं, शहर के लोग भी मुश्किलों का सामना करते हैं। बड़े शैक्षणिक संस्थानों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की पहल होनी चाहिए। इन स्कूलों के प्राइमरी स्तर की पढ़ाई शहर में हो और उससे ऊपर की कक्षाओं का संचालन शहर के बाहर होना चाहिए।
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सोमवार को जाम में फंसी रहीं स्कूल बसें
सोमवार को स्कूल खुलते ही जाम का खेला शुरू हो गया। गांधीनगर क्षेत्र के पक्के, कंपनीबाग पर सबसे ज्यादा समस्या आ रही है। यहां बच्चों को जूझना पड़ा। दोपहर 2:30 बजे पुराना डाकखाना से पक्के के लिए निकले दिवाकर प्रसाद कंपनी बाग में जाम में फंस गए। उसी समय आसपास के स्कूलों से बच्चों को लेकर निकली स्कूली बस व ऑटो भी आ गए। किसी तरह आगे बढ़े तो टाउन क्लब के पास फिर जाम का सामना करना पड़ा। यहां से गांधीनगर पुलिस बूथ पर पहुंचने में काफी वक्त लगा। मौजूद पुलिसकर्मी किसी प्रकार मशक्कत कर वाहनों को आगे बढ़ाते नजर आए। यहां से आगे बढ़ने पर रोडवेज पर भी यहीं समस्या दिखी। बच्चों से भरी बसें, छोटे वाहन गलियों एवं अन्य जगहों से आकर तिराहे पर जाम में फंसे रहे। वाहनों में बैठे बच्चे चहलकदमी कर रहे थे और बाहर बाइक, ऑटो, कार आदि वाहनों में सवार लोग जाम खुलने के इंतजार में रहे। धर्मशाला रोड, रौता चौराहा, ब्लॉक रोड, कटरा, बड़ेवन चौराहे पर स्कूली बस के चलते जाम देखने को मिला। कुछ जगहों पर स्कूलों के बाहर सड़क पर ही वाहन खड़ा कर बच्चों को बैठाते हुए देखा गया।
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कोट
बीडीए ने नई टाउनशिप विकसित करने की योजना तैयार कर ली है। इसके लिए 12.50 एकड़ भूमि की तलाश की जाएगी। इसमें आवास, अस्पताल जैसी सभी सुविधाएं होंगी। पूर्व से स्थापित शिक्षण संस्थान या अस्पताल को विस्थापित करने जैसी कोई योजना फिलहाल नहीं है। हालांकि, इस क्षेत्र की नई संरचना आबादी से हटकर तैयार होनी चाहिए। इसमें आमजन को स्वयं रूचि लेनी चाहिए।
कमलेश चंद्र, सचिव, बीडीए/एडीएम